भारत से बातचीत के लिए गिड़गिड़ाए शहबाज, पाकिस्तान की खुशामद पर भारत क्यों नहीं दे रहा ध्यान, जानें धोखे का इतिहास

इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के साथ बातचीत की ख्वाहिश जताई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उनकी सरकार लंबित विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत के साथ 'सार्थक बातचीत' के लिए तैयार है। की ओर से हालिया समय में, खासतौर से पहलगाम आतंकी हमले के बाद बार-बार भारत से बातचीत की अपील की गई है। दूसरी ओर भारत ने ऐसे 'प्रस्तावों' पर बहुत सतर्कता बरती है और पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता खोलने का कोई संकेत फिलहाल नहीं दिया है। इसकी एक अहम वजह पाकिस्तान का पुराना रवैया है। ने बुधवार को इस्लामाबाद में ब्रिटिश उच्चायुक्त जेन मैरियट के साथ एक बैठक के दौरान भारत-पाक तनाव पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने दोहराया कि भारत के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान तैयार है। उनकी सरकार ने कभी भी बातचीत से पीछे हटने की रणनीति नहीं अपनाई है। दूसरी ओर भारत आक्रामक रवैया अपना रहा है।

भारत को पाकिस्तान की नीयत पर शक

पाकिस्तान के पीएम और कई मंत्री पहलगाम और के बाद ये कह चुके हैं कि वह भारत से बात करना चाहते हैं। दुनिया के अलग-अलग मचों से यह बात कही गई है लेकिन भारत वार्ता में जाने से बच रहा है। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का बातचीत बाद विश्वासघात का पुराना इतिहास रहा है। इसीलिए भारत सरकार पाकिस्तान की बयानबाजी में नहीं फंस रही है।साल 1999 के कारगिल युद्ध से कुछ महीने पहले ही उस वक्त की पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार ने भारत की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के साथ शांति की बात की थी। इसके कुछ महीने बाद भारत को धोखा मिला और उसका नतीजा कारगिल हुआ। इसके बाद 2001 आगरा शिखर सम्मेलन में भारत-पाक में बातचीत फिर से शुरू हुई और इसी साल संसद पर आतंकी हमला हो गया।

आतंक पर स्पष्ट रूख चाहता है भारत

पाकिस्तान की ओर से मुंबई, उरी और पुलवामा हमलों में भी अपनी भूमिका ना होने की बात कही गई। हालांकि हर बार भारत ने देखा कि एक हमले के कुछ समय बाद फिर से पाक समर्थक आतंकियों ने भारत की जमीन को निशाना बनाया। ऐसे में इस दफा भारत कहीं ज्यादा सतर्क दिख रहा है। वह पाकिस्तान से वार्ता से बच रही है। भारत सरकार ने हालिया महीनों में कई बार बेहद स्पष्ट रूप से कहा है कि आतंकवाद की छाया में बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। भारत का कहना है कि पाकिस्तान जब तक अपनी धरती से संचालित आतंकवादी नेटवर्कों को खत्म नहीं करता है, तब तक कोई बात नहीं होगी। ऐसे में भारत कोई भी ठोस बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार नहीं है।


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