दिलरुबा, दौलत और दबदबा! पादरी की प्रेमिका ही निकली कातिल, खुल गई उस खूनी रात की पूरी कहानी

नई दिल्ली: दिलरुबा, दौलत और दबदबा... उस पादरी के पास सबकुछ था। एक शादीशुदा और खूबसूरत प्रेमिका, जो उसके इशारों पर अपने हुस्न की बिजलियां गिराती थी। बेशुमार दौलत, जिसकी उगाही वो धर्म के नाम पर लोगों को डरा-धमकाकर करता था। और... शहर के लोगों पर उसका वर्चस्व। किसी को भी उसके खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं थी। केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सियासी ताकत भी उसके सामने घुटने टेकती थी। लेकिन, एक दिन उस पादरी की हत्या हो जाती है और बीच सड़क पर खून से लथपथ उसकी लाश मिलती है। उसे चाकू से गला काट कर मारा गया था।ना कोई सुराग, ना सबूत और ना ही । हत्या का एक ऐसा केस, जो लंबे वक्त तक एक पहेली बना रहा। गहरी छानबीन चली, लेकिन हत्यारे का कुछ पता नहीं चल पाया। जब कहीं से भी कातिल तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं मिला, तो इस मामले को बंद कर दिया गया। लेकिन अब, इस मामले में चौंकाने वाले सबूत मिले हैं। इन सबूतों की मदद से पादरी की हत्या का राज खुलकर दुनिया के सामने आ गया है। पादरी की हत्या उसकी उसी प्रेमिका ने कराई थी, जिसके साथ मिलकर वह वसूली का रैकेट चलाता था। हत्या क्यों कराई गई, कैसे कराई गई और ये पूरी कहानी क्या थी, आइए आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं।मामला इंग्लैंड के सैलिसबरी शहर का है, यहां के चर्च में जॉन फोर्ड नाम का एक पादरी था। इस पादरी का एक शादीशुदा महिला के साथ अफेयर चल रहा था, नाम था- एला फिट्जपेन। जॉन अपनी प्रेमिका एला और उसके पति के साथ एक रैकेट भी चलाता था। वह छोटे धार्मिक संस्थानों पर छापे मारता और गड़बड़ी मिलने के बाद वहां से वसूली करता था। पादरी अपनी प्रेमिका के साथ मिलकर ऐश की जिंदगी जी रहा था, लेकिन इसी बीच उसके सामने एक राज खुला।

एक राज ने बदल दी सारी कहानी

दरअसल, पादरी जॉन को पता चला कि उसकी शादीशुदा प्रेमिका के कुछ और मर्दों के साथ भी संबंध हैं। पादरी के लिए इस राज का खुलना, सीधे तौर पर उसके अहम पर चोट थी। दरअसल, ये वो दौर था, जब चर्च से जुड़े लोग और पादरी अपना वर्चस्व मानते थे। भले ही कोई कितना ही रईस हो, कितनी ही पावर वाला आदमी हो, लेकिन चर्च के लोगों का अपना रुतबा था। ऐसे में जब पादरी को पता चला कि उसकी प्रेमिका केवल उसकी नहीं है, तो उसने इसे अपना अपमान समझा।

ना बदन पर गहने होंगे, ना अच्छे कपड़े

पादरी ने एक योजना बनाई और साजिश रचकर अपनी प्रेमिका एला को एक में दोषी करार दे दिया। एला को सजा सुनाई गई कि वह हर दिन सुबह-शाम नंगे पैर, चर्च की परिक्रमा करेगी। अपने बदन पर, वो ना कोई गहना पहन सकेगी और ना ही शानदार कपड़े। उसे चर्च को जुर्माने के तौर पर एक मोटी रकम भी देनी होगी। पादरी के लिए ये केवल एक सजा नहीं थी, बल्कि उसका बदला था। वो दिखाना चाहता था कि उसे दगा देने वालों का क्या हस्र होता है।

भाई के साथ मिलकर खौफनाक साजिश

इधर, एला ने भी इस सजा को अपने आत्मसम्मान पर चोट की तरह माना। वह कोई मामूली महिला नहीं थी, बल्कि उस वक्त एक बड़े पद पर थी। वो गुस्से से भर उठी और पादरी से बदला लेने के लिए अपने भाई के साथ मिलकर एक योजना बनाई। योजना थी- पादरी की हत्या। अपने मंसूबे को अंजाम देने के लिए एला और उसके भाई ने अपने दो नौकरों को इस साजिश में शामिल किया। कत्ल के लिए एक दिन चुना गया और शाम ढलते ही जब अंधेरा बढ़ा तो बहाने से पादरी को बुलाया गया।

ना कातिल मिला, ना आला-ए-कत्ल

जैसे ही मौका मिला, चारों ने मिलकर एक धारदार चाकू से उसका गला काट दिया। इसके बाद उसकी लाश को एक ऐसी सड़क पर फेंक दिया गया, जहां दिन निकलते ही लोगों की भीड़ उमड़ आती थी। सूरज निकला, तो पूरे शहर में शोर मच गया। पादरी की हत्या की खबर आग की तरह फैली, लेकिन उसे किसने मारा, ये किसी को पता नहीं चल पाया। सबकुछ रात के अंधेरे में हुआ था। कातिल और आला-ए-कत्ल (हथियार)... सब छिप चुके थे। मामला पूरी तरह से एक पहेली बन गया।

700 साल बाद मामले का खुलासा

आपको जानकर हैरानी होगी कि ये घटना 1377 की है, जिसका राज अब जाकर, यानी 700 साल बाद खुला है। लंबी छानबीन और हजारों दस्तावेज खंगालने के बाद इस मामले का खुलासा किया है कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के इतिहासकारों ने। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी के 'मेडिवल मर्डर मैप्स' प्रोजेक्ट के तहत इस मामले की तफ्तीश की गई। तफ्तीश को अपनी टीम के साथ मिलकर प्रोफेसर मैनुअल आइजनर ने अंजाम दिया। उन्होंने कोरोनर्स रोल्स, कानूनी दस्तावेजों और चर्च के आर्काइव की छानबीन की और मामले की तह तक गए।

वासना, पावर और बदले की कहानी

प्रोफेसर आइजनर ने अपनी रिसर्च के बाद बताया कि पादरी जॉन फोर्ड की हत्या एक थी। चर्च ने एला को बेइज्जत किया था और ये हत्या उसी का बदला थी। यह वासना, शक्ति और बदले की कहानी थी। रिकॉर्ड बताते हैं कि हत्या को अंजाम देने के लिए एला और उसके भाई ने दो नए नौकरों की भी मदद ली थी। आगे की जांच से पता चला कि ऐला, उसके पति और जॉन फोर्ड ने धार्मिक संस्थानों को आतंकित करने वाला एक जबरन वसूली गिरोह बनाया था। पुराने चर्च रिकॉर्ड के मुताबिक, इस गिरोह ने एक बार एक मठ पर छापा मारा, वहां से संपत्ति चुराई और फिरौती वसूलने के लिए उनके पशुओं को बंधक बना लिया।


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