अमेरिका ने ईरान के फोर्डो में 200 फीट धरती फाड़कर गिराया बंकर बस्टर, B-2 बॉम्बर्स ने 37 घंटे तक भरी थी उड़ान, जानें मिशन का खर्च
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिकी बी-2 बॉम्बर ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला करने के लिए लगातार 37 घंटे तक उड़ान भरी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि अमेरिका के विमानों ने मिसौरी से लगभग 37 घंटे तक बिना रुके उड़ान भरी थी। जिसके बाद इन विमानों ने रविवार को सुबह-सुबह ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला किया। स्टेल्थ बमवर्षकों ने बीच हवा में कई बार ईंधन भरा और ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों फोर्डो, नतांज और इस्फाहान पर हमला किया। अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर से GBU-57 बम को गिराया, जो दुनिया का सबसे विशालकाय बंकर बस्टर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि GBU-57 बम ने ईरान के परमाणु स्थलों को तबाह कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस ऑपरेशन को 7 बी-2 बॉम्बर्स ने अंजाम दिया है।अमेरिका के और बी-2 बॉम्बर के इस ऑपरेशन पर दुनियाभर की नजर है, इसलिए इस विमान और इस बम की लागत और इस ऑपरेशन में कुल कितना खर्च आया, इसको लेकर लोगों में काफी दिलचस्पी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बी-2 बॉम्बर की हर उड़ान में औसत खर्च 1.5 लाख डॉलर प्रति घंटे मानी जाती है। चूंकी अमेरिका का ये मिशन करीब 37 घंटों का था, इस आधार पर उड़ान की कुल लागत करीब 39 मिलियन डॉलर बैठती है। इसमें हथियारों की कीमत, ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों की उड़ानें और मिशन को समर्थन देने में लगी बाकी सभी एसेट्स शामिल नहीं हैं।ईरान पर हमले में अमेरिका को कितना खर्च आया है?द वॉर जोन के एडिटर इन चीफ टेलर रोग्वे के मुताबिक इस ऑपरेशन में B-2 बॉम्बर्स ने अमेरिकी एयरस्पेस से उड़ान भरकर कई हवाई सीमाओं को पार करते हुए सीधे के अंदर गहराई तक जाकर अपने हथियार गिराए और फिर सुरक्षित लौट आए। यह मिशन न सिर्फ तकनीकी नजरिए से, बल्कि भूराजनीतिक और मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर भी अमेरिका की शक्ति का प्रदर्शन था। उन्होंने कहा है कि VC-25A और E-4B के अलावा B-2 बॉम्बर उड़ाने के लिए सबसे महंगे विमान हैं। हाल के वर्षों में अमेरिका ने इनकी संख्याओं में नया इजाफा नहीं किया है, क्योंकि एक बी-2 बॉम्बर की कीमत करीब 2 अरब डॉलर है। उन्होंने लिखा है कि "बी-2 बॉम्बर को एक डिजास्टर कार्यक्रम माना गया। पेंटागन की मौत के चक्र का पोस्टर चाइल्ड। 30 साल बाद कोई भी यह तर्क नहीं देगा कि यह बिल्कुल महत्वपूर्ण निवेश नहीं था।"B-2 स्पिरिट दुनिया का सबसे महंगा ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट है। इसे ऑपरेट करने और मेंटिनेंस की लागत काफी ज्यादा है। मिशन के दौरान इन बमवर्षकों को कम से कम 3 से 4 बार इन-फ्लाइट रिफ्यूलिंग की जरूरत पड़ी, जिसके लिए KC-135 और KC-46 जैसे टैंकर विमानों को मिशन में शामिल किया गया था। इन विमानों की रेंज और ऑपरेशनल स्पीड को देखते हुए मिशन को बेहद बारीकी से प्लान किया गया था, ताकि ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम में घुसे बिना ही अपने लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सके। उन्होंने कहा है कि शुरू में बी-2 विमान प्रोजेक्ट को फेल माना गया था और सिर्फ 21 विमानों का ही निर्माण किया गया, लेकिन अब अमेरिका के पास 20 विमान हैं।B-2 बॉम्बर से गिराया गया GBU-57 बमबी-2 बॉम्बर ने 37 घंटे की उड़ान के बाद फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर GBU-57 बम गिराए हैं। GBU-57A/B को MOP यानि Massive Ordnance Penetrator बम कहा जाता है और ये एक बंकर बस्टर बम है। इसका कुल वजन करीब 30 हजार पाउंट यानि करीब 13 हजार किलोग्राम है और यह दुनिया के सबसे भारी नॉन-न्यूक्लियर बमों में से एक है। इसकी क्षमता 200 फीट यानि करीब 60 मीटर तक गहरे कंक्रीट या ग्रेनाइट में घुसकर विस्फोट करने की है। इसीलिए इसे बंकर बस्टर यानि भूमिगत ठिकानों को तबाह करने वाला बम कहा जाता है। इसका प्रमुख लक्ष्य गहरे भूमिगत सैन्य ठिकाने, परमाणु हथियार निर्माण केंद्र और सुरंगों को नष्ट करना होता है, जैसे कि ईरान का फोर्डो न्यूक्लियर साइट। यह एक GPS-गाइडेड स्मार्ट बम है, जो अत्यधिक सटीकता से निशाना साधता है, खासकर गहरी भूमिगत संरचनाओं पर। अमेरिका ने इस बम को 2011 में ऑपरेशनल घोषित किया था और इसके कई अपग्रेडेड वर्जन अब B-2 बॉम्बर के शस्त्रागार में मौजूद हैं।GBU-57 बम की कीमत 30 करोड़ से 38 करोड़ भारतीय रुपये के करीब है। यह कीमत बम को बनाने से लेकर उसमें GPS गाइडेंस सिस्टम, स्पेशल एलिमेंट इस्तेमास करने और इसके गहरे बंकरों में घुसकर फिर ब्लास्ट करने की क्षमता डिजाइन करने में खर्च होते हैं। इसमें B-2 बॉम्बर से गिराने की लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल लागत शामिल नहीं है। इस बम का इस्तेमाल काफी सीमित तरीके से किया जाता है, जैसे इस बार ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला करने के लिए किया गया है।
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