नक्सलियों का हेडक्वार्टर तबाह, गढ़चिरौली के बारूदी सुरंगों वाले जंगल में 200 C-60 कमांडो का खतरनाक ऑपरेशन
नागपुर : गढ़चिरौली पुलिस के 200 खास C-60 कमांडो ने एक बड़ा ऑपरेशन किया। उन्होंने अबूझमाड़ में माओवादियों के हेडक्वार्टर पर हमला किया। यह हमला सोमवार सुबह 6:30 बजे हुआ। कमांडो ने माओवादियों के एक अहम कैंप को तबाह कर दिया। दोनों तरफ से दो घंटे तक खूब गोलियां चलीं। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के खतरनाक जंगल और पहाड़ी इलाके में हुआ। इससे माओवादियों के Tactical Counter Offensive Campaigns (TCOC) को बड़ा झटका लगा है। माओवादी TCOC के ज़रिये इलाके में तबाही करना चाहते थे।जंगल में खून के धब्बे मिले हैं। इससे पता चलता है कि माओवादियों को भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, बचे हुए माओवादी अपने साथियों के शवों को खींचकर ले गए। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि कितने माओवादी मारे गए हैं या घायल हुए हैं।
इस तरह भाग निकले माओवादी
कमांडो ने माओवादी कैंप को घेरने की पूरी कोशिश की। लेकिन, एक तरफ खड़ी चट्टान की वजह से उन्हें परेशानी हुई। चट्टान की वजह से एक छोटा सा रास्ता खुला रह गया। यह रास्ता 15 सदस्यों वाले भामरागढ़ दलम के लिए जीवनदान साबित हुआ। माओवादियों ने घने जंगल और मुश्किल रास्तों का फायदा उठाया और इसी रास्ते से भाग निकले।चट्टान बनी माओवादियों के लिए वरदान
गढ़चिरौली के एडिशनल एसपी यतीश देशमुख ने कहा कि हमने उन्हें तीन तरफ से घेर लिया था। लेकिन, खड़ी चट्टान की वजह से उन्हें चमत्कारिक ढंग से भागने का मौका मिल गया। उन्होंने बताया कि देर शाम तक माओवादियों के नुकसान का पता नहीं चल पाया था।रविवार शाम शुरू हुआ था ऑपरेशन
यह ऑपरेशन रविवार शाम को शुरू हुआ। पुलिस को खबर मिली थी कि भामरागढ़ लोकल ऑर्गनाइजेशनल स्क्वाड (दलम) के हथियारबंद माओवादी, छत्तीसगढ़ बॉर्डर से 200 मीटर दूर बने नए कवांडे पोस्ट के पास हैं। एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एडमिनिस्ट्रेशन) एम रमेश के नेतृत्व में स्पेशल ऑपरेशन टीम ने अबूझमाड़ के बारूदी सुरंगों से भरे जंगलों में माओवादियों को ढूंढा।लगातार चली गोलियां
सुबह होते ही गोलियां चलने लगीं। कम से कम 15 माओवादियों ने सदर जंगल इलाके में तीन अलग-अलग जगहों पर कमांडो पर गोलियां बरसाईं। C-60 यूनिट ने रात भर घात लगाकर हमला किया था। उन्होंने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और दो घंटे तक माओवादियों से जमकर मुकाबला किया। माओवादियों ने खुली चट्टान का फायदा उठाया और घने जंगलों में भाग गए।भारी मात्रा में मिले हथियार
मुठभेड़ वाली जगह की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में हथियार और सामान मिला। इससे पता चलता है कि ऑपरेशन सफल रहा। कमांडो ने एक INSAS सेल्फ-प्रोपेल्ड राइफल, एक सिंगल-शॉट राइफल, एक मैगजीन, एक डेटोनेटर, एक रेडियो, तीन रकसैक, दो वॉकी-टॉकी, दो वॉकी-टॉकी चार्जर और माओवादी साहित्य का एक बड़ा जखीरा बरामद किया।बरामद हुए सामान से पता चला कि माओवादी TCOC रणनीति के तहत घात लगाकर हमला करने और दूसरे विध्वंसक काम करने की योजना बना रहे थे। इस ऑपरेशन से माओवादी कैंप भी तबाह हो गया। इससे उनकी काम करने की क्षमता और कमजोर हो गई है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि स्पेशल ऑपरेशंस टीम के कमांडो ने माओवादियों को पीछे धकेलने और उनके बेस को तबाह करने में बहुत अच्छा काम किया है।गढ़चिरौली में माओवाद खात्मे की ओर
गढ़चिरौली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में माओवादियों की संख्या काफी कम हो गई है। अब सिर्फ 30 हथियारबंद कैडर और 15 लॉजिस्टिक्स और सप्लाई टीम के सदस्य ही बचे हैं। भामरागढ़ दलम और कंपनी नंबर 10 ही इलाके में बचे दो अहम गुरिल्ला संगठन हैं। अधिकारी ने कहा कि हमने इनमें से एक संगठन को लगभग खत्म कर दिया है। इससे हम गढ़चिरौली में माओवादी खतरे को खत्म करने के और करीब पहुंच गए हैं।यह ऑपरेशन गढ़चिरौली पुलिस के माओवादी विद्रोह के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियान का नतीजा है। C60 कमांडो ने बारूदी सुरंगों से भरे और घने जंगलों वाले अबूझमाड़ में घुसकर अपनी बहादुरी और रणनीति का शानदार प्रदर्शन किया है। अबूझमाड़ लंबे समय से माओवादियों का गढ़ रहा है।पूरी तैयारी के साथ उतरी टीम
गढ़चिरौली पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने अबूझमाड़ में माओवादियों के हेडक्वार्टर पर हमला करके उनके एक अहम कैंप को तबाह कर दिया है। यह इलाका माओवादियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। यहां से वे अपनी गतिविधियों को चलाते थे। इस ऑपरेशन से माओवादियों को बड़ा झटका लगा है। पुलिस ने यह ऑपरेशन बहुत ही सावधानी से किया। उन्होंने पहले पूरी जानकारी जुटाई और फिर योजना बनाई। इसके बाद 200 C-60 कमांडो ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। कमांडो ने सुबह 6:30 बजे माओवादियों के कैंप पर हमला किया। दोनों तरफ से दो घंटे तक गोलियां चलीं। यह इलाका महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर पर है। यहां जंगल और पहाड़ हैं, जिससे यह बहुत खतरनाक है।from https://ift.tt/N6VZOFX
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