सिंधु के पानी रोकने से पाकिस्तान में कोहराम, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा, सूखने लगी नदियां, दुश्मन पर भारत का तीन तरफा वार

इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि रोकने के भारत के फैसले पर भारत के ही कई बुद्धिजीवी सवाल उठा रहे थे। वो तंज कस रहे थे कि पर इसका कोई असर नहीं होगा। लेकिन सैटेलाइट तस्वीरें झूठ नहीं बोलती हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में सूखे की स्थिति शुरू हो गई है। पाकिस्तान की नदियां और नाले सूखने लगे हैं, जिससे फसलों के खराब होने की आशंका मंडराने लगी है। असल में भारत ने दुश्मन के खिलाफ तीन डिप्लोमेटिक हथौड़े चलाए हैं, जिससे पाकिस्तान का कमर टूटना तय माना जा रहा है। Marala Headworks ने कुछ सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि सस्पेंड होने के असर का आकलन किया गया है। इन तस्वीरों से पता चलता है कि पाकिस्तान सूखे के संकट में फंस सकता है। के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने तीन सख्त डिप्लोमेटि फैसले लिए हैं। 1- भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, 2- द्विपक्षीय व्यापार को रोक दिया है और तीसरा- पहलगाम आतंकी हमले के बाद दवा निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के साथ साथ उसकी मेडिकल फैसिलिटी पर भी गंभीर असर पड़ने लगा है। भारत के इन फैसलों से पाकिस्तान के कृषि सेक्टर, उर्वरक आपूर्ति और महत्वपूर्ण जल संसाधनों को लेकर संकट शुरू हो गया है।पाकिस्तान में सूखे का संकट शुरूसिंधु जल संधि के तहत को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का लगभग 80% पानी मिलता है जो भारत से होकर पाकिस्तान में बहती हैं, जबकि पूर्वी नदियों (ब्यास, रावी और सतलुज) से भारत को 20% पानी मिलता है। संधि के निलंबन से पाकिस्तान बिलबिला उठा रहा है और सरहद पार से परमाणु युद्ध की धमकियां दी जा रही हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कूटनीति और निरस्त्रीकरण के एसोसिएट प्रोफेसर हैप्पीमॉन जैकब ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत का ये "यह एक चतुर, लोकप्रिय और लोकलुभावन उपाय है।" खेती, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है, जो पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 20% का योगदान देती है और इसके 38% से ज्यादा श्रम बल को रोजगार देती है। दूसरी हकीकत ये है कि पाकिस्तान की 80% से ज्यादा कृषि और लगभग एक तिहाई जलविद्युत उत्पादन सिंधु बेसिन के पानी पर निर्भर है। पाकिस्तान की छटपटाहट की वजह यही है। सिंधु जल समझौता सस्पेंड करके भारत ने पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) के पानी को प्रतिबंधित करने या मोड़कर सिर्फ भारतीय इस्तेमाल के संकेत दिए हैं। हालांकि भारत पानी के प्रवाह को रोक नहीं सकता है, लेकिन नदी के प्रवाह में अगर थोड़ी भी कमी आती है तो पंजाब और सिंध जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सिंचाई बाधित हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के इस फैसले से पाकिस्तान में गेहूं, चावल, कपास और गन्ने जैसी फसलों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।सिंधु जल पर कितना निर्भर है पाकिस्तान?अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़ों (2015-2018 औसत) के मुताबिक सिर्फ पंजाब प्रांत पाकिस्तान के गेहूं उत्पादन का 77% हिस्सा योगदान देता है। सिंध 15% का योगदान देता है, जबकि खैबर पख्तूनख्वा करीब 5% और बलूचिस्तान करीब 3.5% का योगदान देता है। लिहाजा पाकिस्तान के गेहूं क्षेत्र का हृदय स्थल चिनाब, झेलम, रावी और सतलुज जैसी नदियों से घिरा हुआ है और ये सभी नदियां भारत से निकलती हैं। इसका मतलब ये है कि अगर भारत जल के प्रवाह को रोकता है तो पाकिस्तान के गेहूं उत्पादन के तीन-चौथाई हिस्से पर बुरी तरह का प्रभाव पड़ेगा। आर्थिक संकट की वजह से पाकिस्तान में पहले ही खाद्य पदार्थों की कीमत आसमान छू रही हैं। ऐसे में कृषि उत्पादन पर अगर असर पड़ता है, खासकर अगर गेहूं उत्पादन कम होता है, तो पाकिस्तान की मुद्रास्फीति को बुरी तरह से प्रभावित करेगा। इससे पाकिस्तान में गरीबी बढ़ेगी और ग्रामीण इलाकों में खाद्य संकट खतरनाक स्तर पर पढ़ेगा। गेहूं की कमी पाकिस्तान को अनाज आयात करने के लिए भी मजबूर कर सकती है, जिससे उसके कमजोर विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा।


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