कन्हैया को लेकर चिराग का हथियार तैयार, 2025 के रण में निशाने पर रहेंगे राहुल गांधी

पटना: नजदीक आते ही राज्य के नेताओं की ओर से जिस तरह से बयानबाजी हो रही उसके देखते हुए ये लाइन सटीक बैठती है। 'इक परिंदा अभी उड़ान में है, तीर हर शख़्स की कमान में है'। हर राजनीतिक दल अपने स्तर से प्लानिंग में जुटी है। इस बार के बिहार चुनाव में कई ऐसे रंग दिखेंगे जिसे पहली बार देखने और समझने का मौका मिलेगा।राजनीति के नये रंगों में कांग्रेस नेता भी एक हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कन्हैया को जब से बिहार भेजा है तब से वह ना केवल सहयोगी, बल्कि विरोधी दलों के निशाने पर आ गए हैं। कन्हैया कुमार के बिहार में उतरने से जहां आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव नाराज बताए जा रहे हैं, वहीं विरोधी एनडीए गठबंधन के तमाम नेता उनपर निशाना साध रहे हैं।खासकर के चर्चित युवा चेहरों में शुमार लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कन्हैया कुमार पर किया गया कॉमेंट है। यानी एक तरफ जहां तेजस्वी यादव तथाकथित सेक्युलर खेमे में खुद के अलावा को कन्हैया कुमार जैसा दूसरा युवा चेहरा नहीं चाहते हैं। वहीं एनडीए खेमे के प्रमुख चेहरे चिराग पासवान भी कन्हैया कुमार को लेकर बयानबाजी तेज कर दी है।

राहुल गांधी और कन्हैया कुमार को लेकर चिराग ने क्या कहा?

चिराग पासवान से पूछा गया कि बिहार चुनाव को देखते हुए राहुल गांधी बिहार के चार दौरे कर चुके हैं, कन्हैया कुमार उनके साथ हैं। इसपर चिराग ने कहा, 'करें वो जितने दौरे करने चाहें, वो उतनी ही हमारी मदद करेंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'सोचिए कौन है उनके साथ, सारी चीजें एक जगह, लेकिन राष्ट्रहित से ऊपर कुछ नहीं। कितनी भी बंटवारे की राजनीति कर लें, सांप्रदायिकता, जातियता जो कर लें, लेकिन राष्ट्र के ऊपर कुछ नहीं है। हर भारतीय को सोचना चाहिए जो देश में रहकर बंटवारे की राजनीति करता हो, जो देश में रहकर भारत के टुकड़े करने की सोच रखता हो, क्या ऐसे व्यक्ति कि साथ किसी को भी जुड़ना चाहिए। चिंता की बात यह है कि हमारे देश की लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष उनके साथ खड़े होते हैं। जिन्होंने देश के टुकड़े करने के नारे लगाए। ये उचित नहीं है।'चिराग से कहा गया कि कन्हैया कहते हैं कि यह बात कहीं साबित नहीं हो पाया है कि उन्होंने भारत के टुकड़े टुकड़े करने के नारे नहीं लगाए। हां यह जरूर है कि वह बीजेपी के टुकड़े टुकड़े करने के लिए राजनीति में आए हैं। इस पर चिराग कहते हैं कि वो प्रयास करें, उनके नेता भी इसी प्रयास में हैं, देखिए किसी सफलता मिलती है।

पीके पर नरम और कन्हैया पर गरम, माजरा क्या है?

यहां गौर करने वाली बात यह है कि चिराग पासवान से जब पिछले दिनों जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह बिहार के लिए अच्छा प्रयास कर रहे हैं, लेकिन 2025 के चुनाव में साबित होगा कि बिहार की जनता उनके प्रयास को किस रूप में ले रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के बिहार आते ही चिराग पासवान हमलावर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कन्हैया कुमार को लेकर चिराग पासवान अभी से इतने अग्रेसिव क्यों हैं।

कन्हैया कुमार को खतरा मान रहे बिहार के युवा नेता?

बिहार की मौजूदा राजनीति को देखकर ऐसा लग रहा है कि कन्हैया कुमार बिहार के ज्यादातर युवा नेताओं को खटक रहे हैं। दरअसल, कन्हैया कुमार खुद की सेक्युलर छवि बनाने की कोशिश में हैं। चिराग पासवान और तेजस्वी यादव भी कहीं ना कहीं खुद को सेक्युलर नेता के रूप में पहचान बना पाए हैं। जहां तक एजुकेशन की बात है तो कन्हैया कुमार इन दोनों नेताओं से कहीं ज्यादा शिक्षित हैं। फैन फॉलोइंग बनाने में कन्हैया राष्ट्रीय स्तर पर जनसभाएं करते हैं।


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