बचपन से रंगों से लगाव ऐसा रंग लाया कि बन गई मिसाल, सलाम प्रज्ञा

अररिया: आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। महिला दिवस पूरी तरह उन महिलाओं को समर्पित है, जो मिसाल स्थापित कर देश प्रदेश में अपने काम से मजबूत पहचान बनाती हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बनती हैं। ऐसी ही है अररिया जिला के सुदूरवर्ती कुर्साकांटा प्रखंड की वार्ड संख्या 11 की रहने वाली प्रज्ञा कुमारी। जिन्होंने आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी पेंटिंग के शौक को पूरा करने के लिए ट्यूशन पढ़ाकर अर्जित पैसे से 21 सौ स्क्वायर फीट लंबे कैनवास पर भगवान शिव के दिव्य स्वरूप की अनोखी पेंटिंग का निर्माण कर दिया।

प्राकृतिक रंगों से 121 स्क्वॉयर फीट की पेंटिंग

प्राकृतिक रंगों से तैयार उनकी पेंटिंग को देश प्रदेश के कई मंचों पर सराहना की गई और उनको सम्मानित भी किया गया। भगवान शिव के दिव्य स्वरूप की 21 सौ स्क्वायर फीट कैनवास पर पेंटिंग के बाद वर्तमान समय में प्रज्ञा के कला, इतिहास और संस्कृति से जुड़ी 18 मीटर लंबी बिहार के मानचित्र की पेंटिंग पर कार्य कर रही हैं। उनकी ये पेंटिंग राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करेगी। इस पेंटिंग का प्रदर्शन बिहार दिवस पर किया जाएगा।

बचपन से ही प्रज्ञा को रंगों से लगाव

प्रज्ञा कुमारी को बचपन से ही रंगों और चित्रों के प्रति गहरा लगाव था। जब अन्य बच्चे खेलकूद में व्यस्त रहते, तब प्रज्ञा अपनी कल्पनाओं को कागज पर उकेरने में मग्न रहती। स्कूल और कॉलेज में आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिताओं में वह हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त करती रही, जिससे उसकी कला के प्रति रुचि और भी गहरी हो गई।

लगन ने पहुंचाया दिया शीर्ष पर

प्रज्ञा ने मन में ठाना कि वह अपनी चित्रकला के माध्यम से न केवल अपने गांव बल्कि पूरे राज्य का नाम रौशन करेगी। इसी सोच के साथ उसने कुछ अद्वितीय करने का निर्णय लिया। उसने भगवान शिव के दिव्य स्वरूप को 21 सौ स्क्वायर फीट के विशाल कैनवास पर उकेरने का निश्वय किया। यह कोई साधारण कार्य नहीं था, क्योंकि उसके गांव में संसाधनों की कमी थी और आर्थिक कठिनाइयां भी सामने थी। अपनी इस महत्त्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए प्रज्ञा ने ट्यूशन पढ़ाकर आवश्यक सामग्री जुटाई और दिन-रात कड़ी मेहनत करने लगी।

6 महीने में दिखाई अपनी प्रतिभा

छह महीने की अथक परिश्रम के बाद, उसने वह असाधारण पेंटिंग तैयार की, जिसे देखकर हर कोई अचंभित रह गया। यह पेंटिंग न केवल आकार में विशाल थी, बल्कि इसकी कलात्मकता भी अद्वितीय थी। यह एक ऐसा कीर्तिमान था, जिसे पहले कभी किसी ने स्थापित नहीं किया। प्रज्ञा की यह अनूठी कृति सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई। उसकी इस उपलब्धि के लिए कई गैर-सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों ने उसे सम्मानित किया। विभिन्न मंचों पर उसे आमंत्रित कर उसकी कला और समर्पण की सराहना की गई।

17 मीटर लंबी पेंटिंग बनाने में लगी प्रज्ञा

प्रज्ञा अब बिहार के कला, इतिहास और संस्कृति से जुड़ी 18 मीटर लंबी बिहार के मानचित्र की पेंटिंग पर कार्य कर रही है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करेगी। इसके अलावा, वह आर्ट एंड क्राफ्ट में भी रुचि रखती है और अपने हस्तनिर्मित कलाकृतियों को विक्रय कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास कर रही है। उसकी कला से प्रेरित होकर गांव के कई बच्चे भी उससे प्रशिक्षण ले रहे हैं, ताकि वे भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। प्रज्ञा की यह यात्रा संघर्ष और समर्पण की एक मिसाल है, जो न केवल उसे बल्कि उसके गांव और राज्य को भी गौरवान्वित कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रज्ञा की इस उपलब्धि के लिए उसे सलाम है।अररिया संवाददाता राहुल कुमार ठाकुर की स्पेशल रिपोर्ट


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