गुड न्‍यूज! जेपी असोसिएट्स में फंसे 2100 बायर्स को फ्लैट बनाकर देगी यमुना अथॉरिटी

ग्रेटर नोएडा: की ओर से 2020 में निरस्त किए गए जेपी असोसिएट्स के 1000 हेक्टेयर के प्लॉट के फैसले को हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सही ठहराया है। पिछले कई वर्षों से इस मामले को लेकर यमुना अथॉरिटी और जेपी असोसिएट्स हाई कोर्ट में लड़ रहे थे। अब हाई कोर्ट ने यमुना अथॉरिटी के पक्ष में फैसला दिया है। इसमें अधूरे प्रॉजेक्टों को पूरा करने के लिए हाई कोर्ट ने एक कमिटी बनाने का भी आदेश दिया है। इस जमीन पर ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्टों में फंसे बायर्स को फ्लैट पूरे कराने की जिम्मेदारी यमुना अथॉरिटी की होगी। इस जमीन पर बुद्ध इंटरनैशनल सर्किट बना हुआ है। कई अधूरे प्रॉजेक्टों में करीब 2100 बायर्स फंसे हुए हैं, जिन्हें अब यमुना अथॉरिटी फ्लैट पूरे करके देगी।बता दें कि जेपी असोसिएट्स पर यमुना अथॉरिटी का 2000 करोड़ से भी ज्यादा का बकाया था। कंपनी की ओर से बकाया न देने के चलते यमुना अथॉरिटी ने 2020 में कंपनी को आवंटित 1000 हेक्टेयर के प्लॉट को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद कंपनी इलाहाबाद हाई कोर्ट चली गई है और वहां प्लॉट का आवंटन बहाल कराने के लिए अपील की। उधर, यमुना अथॉरिटी ने अपनी अपील में कहा कि कंपनी 100 करोड़ रुपये अथॉरिटी के खाते में जमा कराए उसके बाद अथॉरिटी इस पर पुनर्विचार करेगी। पिछले कई साल से यह मामला हाई कोर्ट में चल रहा था। कंपनी की ओर से अथॉरिटी के खाते में शेड्यूल के हिसाब से समय पर पैसा जमा नहीं कराया जा सका, जिसके चलते अब हाई कोर्ट ने यीडा के पक्ष में फैसला लेते हुए प्लॉट निरस्तीकरण के आदेश को सही ठहराया है।

अधूरे प्रॉजेक्ट पूरे करेगी अथॉरिटी

साथ ही यमुना अथॉरिटी की ओर से यह भी अपील की गई थी कि इसमें फंसे बायर्स के भविष्य को सुरक्षित रखा जाएगा, उन्हें फ्लैट पूरे करके देने की जिम्मेदारी अथॉरिटी की होगी। इसी के चलते हाई कोर्ट ने कमिटी बनाने के लिए आदेश दिया है, जो इन अधूरे प्रॉजेक्टों को पूरा कराने के रिपोर्ट तैयार करेगी। इनमें करीब 12 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्ट और कुछ प्लॉट वाले प्रॉजेक्ट हैं। इन सभी को पूरा करने की जिम्मेदारी अब यीडा की होगी। वहीं, एनसीएलटी में भी जेपी असोसिएट्स का मामला विचाराधीन है। इसके लिए भी हाई कोर्ट ने कुछ निर्देश दिए हैं।

मोटो जीपी जैसे हो चुके हैं कार्यक्रम

यमुना एक्सप्रेसवे पर बीआईसी वही स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है, जिसमें फार्मूला-1 और मोटो जीपी जैसे इंटरनैशनल इवेंट हो चुके हैं। अब इसकी देखरेख की जिम्मेदारी यमुना अथॉरिटी की होगी। इसके अलावा 1000 हेक्टेयर जमीन का विकास कैसे किया जाना है, इसका फैसला भी अब अथॉरिटी लेगी। बिल्डर की ओर से बकाया चुकता न हो पाने की वजह से यह जमीन अब अथॉरिटी के पास वापस आ गई है।


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