फर्जी केस में जेल में काटे 20 साल... अतुल सुभाष से ताजा हुआ विष्णु तिवारी का जख्म, सिस्टम ने तबाह कर दी जिंदगी

ललितपुर: आजकल अतुल सुभाष () का प्रकरण हर जुबान पर छाया हुआ है। मूलत: बिहार निवासी अतुल बेंगलुरु में इंजिनियर थे और उनकी शादी उत्तर प्रदेश के जौनपुर निवासी निकिता सिंघानिया से हुई थी। अतुल ने वैवाहिक जीवन में कलह, अदालती प्रक्रिया की वजह से जीवनलीला को समाप्त कर लिया। इस प्रकरण से ललितपुर के विष्णु तिवारी (Vishnu Tiwari) का केस याद आ गया। गौरतलब है कि झूठे SC-ST मुकदमे और पुलिस की फर्जी जांच ने एक युवक का जीवन तबाह कर डाला। वह 20 तक जेल में कैद रहने के बाद 'बाइज्जत बरी' हुए थे। उत्तर प्रदेश के ललितपुर के कोतवाली महरौनी के ग्राम सिलावन निवासी विष्णु तिवारी पर 16 सितम्बर 2000 में गांव के ही एक अनुसूचित जाति की 5 महीने की गर्भवती महिला ने दुष्कर्म और हरिजन ऐक्ट का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने इस मामले में उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिर 2003 में ललितपुर जिला अदालत ने विष्णु को रेप के मामले में 10 साल और एससी एसटी ऐक्ट के मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। जब विष्णु को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय विष्णु की उम्र महज 16 साल थी और वह अगले करीब बीस साल तक जेल में बंद रहे। 20 सालों में उसने अपने माता-पिता, 2 भाइयों को खो दिया। वहीं जमीन जायदाद भी उसकी पैरवी के चलते बिक गई। विष्णु को माता-पिता के अंतिम संस्कार में आने के लिए परोल तक भी नहीं मिला, जिस कारण वह अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाया था। विष्णु का मामला एक डिफेक्टिव केस के तौर पर ही ठंडे बस्ते में पड़ा था। जब हाई कोर्ट ने दोबारा इस मामले पर ग़ौर किया, तो एक नई ही कहानी सामने आई। विष्णु को जिस जुर्म में आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी, उस जुर्म का ना तो कोई सबूत मौजूद था और ना ही कोई ऐसी गवाह या दलील जो शक से परे हो। लिहाजा हाई कोर्ट ने सेशल कोर्ट के जजमेंट को बदलने का फैसला किया। विष्णु 36-37 साल का होने के बाद मार्च 2021 में जेल से बाहर आए। झूठे मुकदमे, पुलिस की हीलाहवाली और कानूनी प्रक्रिया का ये वो काला सच है जिसे सिर्फ विष्णु ने नहीं, बल्कि 20 साल तक पूरे परिवार ने भुगता। विष्णु की मानें तो उसका शिकायतकर्ता परिवार से सिर्फ गाय को बांधने को लेकर मामूली विवाद था।


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