सांसद बनते ही रंग में आए कुशवाहा, बिहार विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर दिखाए तेवर

पटना: एक कहावत है पानी में मछली और नौ-नौ गुरिया हिस्सा। राज्य में एनडीए की राजनीति कुछ इसी तर्ज पर चल रही है। अभी विधान सभा चुनाव में काफी देरी है पर सीटों की हिस्सेदारी को लेकर उपेंद्र कुशवाह मुखर होकर आवाज उठा दी है। हिस्सेदारी को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से तो हर दल में चर्चा चल रही है और हर दल अपने अपने अनुकूल विधान सभा चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर फॉर्मूला भी तय कर रही है। हिस्सेदारी के इस लड़ाई में भले खुलकर राज्य सभा सांसद और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष ने अपना फॉर्मूला जगजाहिर कर दिया है।

कहा- सीटों के बंटवारे का लोकसभा आधार नहीं

राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने आगामी विधान सभा चुनाव की तैयारी की एक बानगी पेश जरूर की है। आगामी विधान सभा चुनाव को लेकर उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी राय सार्वजनिक कर दी है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अलग-अलग होता है। कारण बताते हुए कहा कि लोकसभा के फॉर्मूला से नुकसान हुआ है इसलिए आगे इसमें सुधार होना चाहिए। पुराने अनुभव के आधार पर आदमी आगे करेक्ट करता है। इसलिए करेक्शन होगा।

क्यों ऐसा कहा?

दरअसल, राष्ट्रीय लोक मोर्चा का एक भी सांसद लोकसभा में नहीं है और न ही विधान सभा में कोई विधायक ही। अब गठबंधन की राजनीत में सीटों के बंटवारे को लेकर आपसी समझदारी का मापदंड सदन में कितने सांसद या फिर विधायकों की संख्या के हवाले से होता है। महागठबंधन में जब नीतीश कुमार थे लोकसभा चुनाव के लिए लालू यादव ने विधायकों की संख्या को ही चुनावी आधार माना और इस आधार पर 8 से 10 लोकसभा सीटें जदयू के खाते में डाले। नतीजतन नीतीश कुमार ने एनडीए का दामन थामा और 16 सीटिंग के आधार पर एनडीए में 16 सीटों पर लड़ने की स्वीकृति मिली।

विधान सभा चुनाव में दलितों के हालात क्या हैं?

आगामी विधान सभा चुनाव के लिए एनडीए में शामिल जदयू की हिस्सेदारी का आधार विधान सभा बनाएंगे तो जदयू के हिस्से 43 सीटें आयेंगी। ऐसे में जदयू के रणनीतिकार भाजपा पर यह दवाब बनाएंगे कि आधार लोकसभा का बनाया जाए। विधायकों की संख्या के आधार पर राष्ट्रीय लोजपा, लोजपा (आर), राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास शून्य विधायक हैं। ऐसे में सीटों की हिस्सेदारी भाजपा और जदयू के साथ हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के बीच ही बन सकती है।लोकसभा की बात करें तो लोजपा (आर) और हम का स्ट्राइक रेट 100 फीसदी है। इस लिहाजन विधान सभा में ज्यादा सीटों की बात करेंगे। 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग और उपेंद्र की पार्टी एनडीए से अलग लड़ी थी। जेडीयू 115, बीजेपी 110, वीआईपी 11 और हम 7 सीट लड़ी थी। लेकिन अब एनडीए में चिराग, पारस, कुशवाहा भी शामिल हो गए हैं।

नीतीश कुमार का रहेगा अपर हैंड

राजनीतिक गलियारों की बात करें तो अभी गठबंधन में नीतीश कुमार का अपर हैंड हैं। वे जो तय करेंगे वही मान्य होगा। एक तरह से देखें तो नीतीश कुमार ने अबकी विधान सभा में 200 पार का नारा देकर वर्ष 2010 विधान सभा चुनाव की याद दिला दी। जदयू के अंदरखाने में चर्चा तेज है कि जदयू 120 सीट से कम पर नहीं लड़ेगी। ऐसे में भाजपा के सिर राष्ट्रीय लोक मोर्चा, लोजपा का दोनों धड़ा और हम के बीच विधान सभा सीटों का बंटवारे की जिम्मेवारी है।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने दिखाए तेवर

आगामी विधान सभा में हिस्सेदारी को लेकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने अभी से ही मोर्चा खोल दिया है। ऐसा इसलिए कि अभी से ही एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा शुरू हो जाए। लोकसभा के चुनाव में मात खाए उपेंद्र कुशवाहा चाहते हैं सीटों के बंटवारे शीघ्र हो जाए ताकि उनकी पार्टी वहां से तैयारी कर सके।


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