तीन सप्ताह रोई, दर्द के साथ किया संघर्ष, फिर लौटने का फैसला... गाजियाबाद की रेप पीड़िता किशोरी ने अपनाई 'जिंदगी'

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की 15 वर्षीय किशोरी जब यह कहती है कि अब मेरा एकमात्र लक्ष्य जीवन में सफल होना है, जिसके लिए लोग मुझे जानें। रेप पीड़िता किशोरी के कॉन्फिडेंस और भविष्य के सपनों को आप महसूस कर सकते हैं। आरोपी ने लड़की के जिस स्वाभिमान और गुरूर को तोड़ने की कोशिश की थी, उसमें वह सफल नहीं हो पाया। लड़की एक बार फिर स्कूल लौट आई है। अपने लिए, अपने सपनों को पाने के लिए। एक नई मंजिल की तरफ कदम बढ़ाती लड़की के लिए यह सबकुछ इतना आसान नहीं था। पिछले तीन सप्ताह वह जिस मेंटल ट्रॉमा से गुजरी है, उसके दर्द का हिसाब कोई नहीं लगा सकता। पीड़िता कहती है कि पिछले तीन सप्ताह ने मेरी जिंदगी ही बदल दी। इस दौरान उसके पड़ोसी ने उसका यौन उत्पीड़न किया। घटना के बाद उसने खुद को घर में बंद कर लिया, क्योंकि परिवार को सामाजिक शर्मिंदगी का डर था। उसका नाम स्कूल की सूची से हटा दिया गया।

प्रिंसिपल ने भी लगा दी थी फटकार

स्कूल खुलने के बाद से अनुपस्थित रहने पर लड़की का एडमिशन कैंसिल करने के साथ ही उसके सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने उसे फटकार लगाई थी। प्रिंसिपल को लड़की की अनुपस्थिति के कारणों की जानकारी नहीं थी। घटना से अनजान प्रिंसिपल ने उसके पिता से गुरुवार को कहा कि अगर वह लड़की को स्कूल भेजने में रुचि नहीं रखते हैं तो उसकी शादी करवा दें। प्रिंसिपल को अपनी गलती का अहसास शुक्रवार को तब हुआ जब उन्हें लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के बारे में बताया गया। हालांकि, तब तक बात फैल चुकी थी। सोशल मीडिया पर प्रिंसिपल की कड़ी आलोचना हुई। लड़की के यौन उत्पीड़न, स्कूल से उसका नाम हटाए जाने और उसके पिता पर की गई उनकी टिप्पणियों को एक ही कहानी में मिला दिया गया।शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को इस मामले में हस्तक्षेप किया, जब उन्हें पता चला कि किशोरी के माता-पिता ने 26 जून को यौन उत्पीड़न के बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया था। गर्मी की छुट्टियों के बाद 1 जुलाई को स्कूल फिर से खुल गया था, लेकिन लड़की नहीं आई। तीन अन्य लड़कियां भी नहीं आई थीं। इसे बिना किसी कारण के अनुपस्थिति माना गया। 10 जुलाई को प्रिंसिपल ने रोल से उनके नाम हटाने का फैसला किया। अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई विद्यार्थी किसी कारण से अनुपस्थित हो रहा है तो उसे शिक्षक या प्रिंसिपल को इसकी जानकारी लिखित में देनी होती है।

घर से बाहर नहीं निकली थी लड़की

लड़की के पिता ने शनिवार को बताया कि बेटी सदमे के कारण 26 जून की घटना के बाद से घर से बाहर नहीं निकली है। उन्होंने उसकी सुरक्षा के की भी चिंता जताई, क्योंकि आरोपी एक विवाहित व्यक्ति है, जो उसी कॉलोनी में रहता है। कथित तौर पर आरोपी लड़की से कई बार स्वर्ण जयंती पार्क में मिला था। अब वह न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने बताया कि उस पर बीएनएस की धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के तहत रेप और आपराधिक धमकी का आरोप लगाया गया है। आरोपी ने 16 जून को लड़की को एक होटल में मिलने के लिए बुलाया था, जहां वह उसे एक कमरे में ले गया। वहां कथित तौर पर उसके साथ रेप किया। पिता ने कहा कि लड़की ट्यूशन के लिए गई थी, आम तौर पर दोपहर 2 बजे तक उसका ट्यूशन खत्म हो जाता है। अमूमन वह दोपहर 3.30 बजे तक वापस आ जाती है। लेकिन, उस दिन शाम 6 बजे तक घर नहीं आई। जब वह वापस लौटी तो वह बदहवास दिख रही थी। वह कोई बात नहीं कर रही थी। अगले दिन मैंने उससे इस बारे में पूछा और तब उसने मुझे घटना के बारे में बताया।

लड़की ने किया खुद को अलग

लड़की के साथ रेप की इस घटना ने परिवार को विचलित कर दिया। लड़की ने खुद को अलग-थलग कर लिया, क्योंकि वह इस ट्रॉमा से निपटने की कोशिश कर रही थी। माता-पिता रोए। वे चिंतित थे। इस निराशा के बीच स्कूल ने उसका नाम एडमिशन लिस्ट से हटा दिया। हालांकि, शुक्रवार की रात को प्रिंसिपल उनके दरवाजे पर थी। उनका अंदाज और व्यवहार उस आवाज से बिल्कुल अलग था, जिसमें उन्होंने लड़की के पिता को डांटा था। प्रिंसिपल ने शनिवार को बताया कि उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से यौन उत्पीड़न मामले के बारे में सूचित किए जाने के बाद लड़की का फिर से नामांकन कराया। लड़की को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए मनाने के लिए खुद उससे बात करने का फैसला किया।प्रिंसिपल ने कहा कि जिन लड़कियों के नामांकन वापस लिए गए थे, उन्होंने स्कूल को अपनी अनुपस्थिति के बारे में सूचित नहीं किया था। हमने कई लड़कियों के स्कूल छोड़ने के मामले देखे हैं, क्योंकि उनके परिवार ने उनकी शादी कर दी थी। मुझे लगा कि वह इसी कारण से स्कूल नहीं आ रही है।

प्रिंसिपल ने बताई पूरी बात

स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा हमने किशोरी के पिता को 11 जुलाई को कॉल किया था। वह कॉल एडमिशन लिस्ट से बच्ची का नाम हटाने के लिए एक चेतावनी के तौर पर था। उस समय मुझे नहीं पता था कि क्या हुआ था। एक बार जब मुझे पता चला, मैं व्यक्तिगत रूप से परिवार से मिली। हमने करीब तीन घंटे बात की। लड़की के पिता ने पुष्टि की कि प्रिंसिपल ने उनसे मुलाकात की थी। प्रिंसिपल ने लड़की के स्कूल वापस लौटने की जरूरत को बताया और अपना पूरा सपोर्ट देने की बात कही। पिता ने कहा कि शिक्षा महत्वपूर्ण है, हम यह समझते हैं।शनिवार को किशोरी ने अपने जीवन को सामान्य करने की दिशा में एक कदम पीछे लिया। वह स्कूल वापस आ गई। उसने कहा कि मेरी सबसे जानी-पहचानी जगह बदली हुई लग रही है। यह अजीब अहसास है। ऐसे लगा कि हर कोई मेरी तरफ देख रहा है। मुझे महसूस हो रहा था कि बहुत सी चीजें बदल गई हैं। लेकिन, मुझे अब आगे बढ़ना है।


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