पहली नौकरी और लंदन का ख्वाब, पोर्शे वाले लड़के ने सिर्फ जान ही नहीं सपनों को भी रौंदा... दो अभागे पिता का दर्द

जबलपुर: पुणे पोर्शे हिट-एंड-रन में मारे गए सॉफ्टवेयर इंजीनियर अश्विनी कोष्टा और उनके दोस्त अनीश अवधिया की अस्थियों को गुरुवार को नर्मदा नदी में विसर्जित कर दिया गया। लेकिन दोनों परिवारों में गुस्सा है, जिन्होंने नाबालिग आरोपी और उसके माता-पिता को न्याय के कटघरे में लाने की कसम खाई है। अनीश के पिता ओमप्रकाश अवधिया कहते हैं कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या थी, उन्होंने मामले को मध्य प्रदेश की अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की। अश्विनी के पिता सुरेश कुमार कोष्टा ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून में सुधार की मांग की ताकि ऐसे मामलों में रोकथाम के लिए उचित सजा हो।

आरोपी के साथ नाबालिग जैसा व्यवहार क्यों?

कोष्टा ने बेटी की अस्थियों को विसर्जित करने के बाद कहा कि जो व्यक्ति पब में शराब पर हजारों रुपए उड़ाता है और महंगी कारों में घूमता है, उसके साथ नाबालिग जैसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है । उसे ऐसे अपराध से कैसे बचने दिया जा सकता है, जिसमें दो युवा, प्रतिभाशाली इंजीनियरों की बिना किसी गलती के हत्या कर दी गई? उसके साथ सख्ती से निपटा जाना चाहिए, ताकि किसी अन्य माता-पिता को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। किशोर के माता-पिता भी अपराध के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने उसे कार चलाने की अनुमति दी थी।

जून में था अश्विनी का जन्मदिन

पिता सुरेश कुमार कोष्टा ने बताया कि अश्विनी का जन्मदिन जून में था। कोस्टा ने बताया कि मैं उसी महीने रिटायर होने वाला हूं। हम दोनों ही मौकों को मनाने के लिए उत्सुक थे और वह हमारे लिए होटल बुक करने वाली थी। दुखी पिता ने कहा कि जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट या बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने रोते हुए कहा कि तभी निष्पक्ष जांच संभव है। आंसुओं और पीड़ा ने उन्हें कई बार बीच में ही रुकने पर मजबूर किया, लेकिन उन्होंने खुद को संभाल लिया। उन्होंने कसम खाई कि मैं अपनी आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ूंगा।

निष्पक्ष जांच की मांग की

उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। कोष्टा ने कहा कि घटना में मारे गए दोनों युवा इंजीनियर मध्य प्रदेश के थे और राज्य सरकार को न्याय सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।

10वीं-12वीं में आए थे 99 फीसदी मार्क्स

कोष्टा ने अश्विनी के बचपन को याद करते हुए बताया कि उसने कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं में 99% अंक प्राप्त किए थे। फिर, वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए पुणे चली गई, जहां उसने 90% अंक प्राप्त किए। वह हमेशा उज्ज्वल भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करती थी, और अपनी पढ़ाई में बाधा न आए, इसके लिए वह कहीं बाहर भी नहीं जाती थी। जब उसे अपनी पहली नौकरी मिली तो वह बहुत खुश थी, लेकिन वह इसका आनंद नहीं ले पाई।

एमपी में होनी चाहिए मामले की सुनवाई

अनीश के पिता ओमप्रकाश अवधिया ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश में होनी चाहिए, पुणे में नहीं। तभी न्याय हो सकता है। नाबालिग आरोपी के साथ थाने में मेहमान की तरह व्यवहार किया गया। उसके पास लाइसेंस भी नहीं था, इसलिए यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है। अनीश का परिवार उमरिया जिले के पाली में रहता है।

एमपी में ट्रांसफर हो केस

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को इस मामले को मध्य प्रदेश स्थानांतरित करवाने के लिए पहल करनी चाहिए। ऐसे मामलों में कानून सख्त होना चाहिए। न केवल आरोपी को बल्कि उसके माता-पिता को भी उचित सजा मिलनी चाहिए, ताकि उनके जैसे अन्य माता-पिता को भी सबक मिले।

एडल्ट की तरह केस चले

दोनों परिवार के लोग चाहते हैं कि किशोर, जो अपने 18वें जन्मदिन से चार महीने दूर है, पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जाए। अवधिया ने कहा कि हम अपनी आखिरी सांस तक न्याय के लिए लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह संयुक्त कानूनी लड़ाई के लिए अश्विनी के परिवार से बात नहीं कर पाए हैं।

अनीश हाल ही में गया था दुबई

अनीश के पिता ने बताया कि उसके सपने बड़े थे। वह हाल ही में दुबई गया था और फिर कुछ दिनों के लिए पाली में अपने घर आया था। वह 14 मई को पुणे लौटा और पांच दिन बाद ही वह पुणे की एक सड़क पर मृत पड़ा था।

हायर एजुकेशन के लिए जाना था लंदन

पिता ने कहा कि अनीश ने कहा था कि वह परिवार के सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएगा। उसे उच्च शिक्षा के लिए लंदन जाना था। मेरे पास एक प्रिंटिंग प्रेस है और अपनी मामूली कमाई से मैं अपने बच्चों को पढ़ा पाया। उसकी मौत से हमारे सारे सपने टूट गए।


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