बीकानेर में जमीन इतनी धंसी कि 10 मंजिला इमारत गायब हो जाए, सामने आया हैरान करने वाला कारण

बीकानेर/जयपुर : राजस्थान में पिछले दिनों हुई कुछ भौगोलिक हलचल की घटनाएं लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई हैं। जयपुर में सड़क धंसना हो गया बीकानेर में करीब डेढ़ बीघा जमीन का धंसना, लोग हैरान थे। बीकानेर के सहजरासर गांव में तो सड़क-पेड़ सब अचानक 100 फीट से भी अधिक गहराई में धंस गए। इस हैरानी भरी घटना को लेकर अब भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है। वैज्ञानिक जांच पड़ताल के बाद की रिपोर्ट भी चौंकाने वाली है। भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने बीते दिनों यहां का मौका देखकर बारीकी से मामले की जांच की थी। इसके बाद वैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने तीन दिन बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट को लेकर लूणकरणसर उपखंड प्रशासन ने खुलासा किया है।

टीम की जांच में यह तथ्य आया सामने

पिछले महीने 24 अप्रैल को झालाना डूंगरी (जयपुर) से भारतीय भू-सर्वेक्षण विभाग की तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए पहुंची थी। टीम ने बीकानेर में तीन दिन तक जांच पड़ताल की और इसके बाद प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी। उपखण्ड अधिकारी राजेन्द्र कुमार ने बताया कि जीसीआई ने जमीन धंसने के मामले में अपनी जांच रिपोर्ट में जल के अत्यधिक दोहन को कारण माना है। जांच रिपोर्ट में बताया है कि बरसात की कमी से भूजल रिचार्ज नहीं हुआ। इससे जमीन खोखली हो गई और मिट्टी नीचे चली गई। जीसीआई ने मौसम विभाग, भूजल विभाग, सैटेलाइट समेत कई तरह के साक्ष्य जुटाए हैं। इसके बाद अपनी जांच में पाया कि भूजल रिचार्ज नहीं होने से तथा नीचे की जमीन ज्यादा सख्त नहीं होने से जमीन धंसी। जीसीआई इसे भौगोलिक घटना मान रहा है।

जमीन धंसने का क्या है, पूरा मामला

15 अप्रैल की रात करीब तीन बजे लूणकरनसर-ढाणी भोपालाराम से सहजरासर गांव जाने वाली सड़क पर धंस गई थी। सहजरासर गांव के नजदीक जगूनाथ के खेत की जमीन भी सड़क के साथ धंस गई। इससे 150 से 200 फीट लम्बा-चौड़ा तथा तकरीबन 90-100 फीट गहरा गड्ढा हो गया। करीब 50-60 फीट तक सड़क भी जमींदोज हो गई। एक-दो दिन में दरारें कुछ और बढ़ी। तीन-चार बड़े पेड़ भी जमीन के साथ धंस गए थे।

घटना को लेकर ग्रामीणों का क्या है मानना

हैरान करने वाली यह घटना सहजरासर गांव की है। जहां डेढ़ बीघा जमीन धीरे-धीरे 100 फुट नीचे धंस गई है। यह घटना अब लोगों में आश्चर्य का विषय बन गई है। आसपास के लोगों के अनुसार इस क्षेत्र में कई वर्षों पहले बिजली गिरी। इसके चलते ग्रामीणों का मानना है कि हर साल मिट्टी धंसती गई। इसके चलते लोगों ने इस स्थान को 'बिजलगढ़' का नाम दे दिया।


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