एनबीटी एक्सप्रेस: 'किसान ही मोदी को लाए, दो बार से लगातार हमने जोर लगाया', चुनावी सफर पर क्या-क्या बोले लोग

नई दिल्ली: देश में शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान होगा। एनबीटी का चुनावी सफर भी पूरी रफ्तार में है। हिमसागर एक्सप्रेस में सवार होकर एनबीटी की टीम लोगों से मुखातिब हो रही है। जम्मू से शुरू हुई चुनावी यात्रा 3800 किलोमीटर के सफर में 12 राज्यों से होकर गुजर रही है तो इन राज्यों के अलग-अलग लोग भी मिल रहे हैं। अलग-अलग स्टेशन पर यात्री उतर रहे हैं तो नए यात्री चढ़ भी रहे हैं। ट्रेन अब ग्वालियर पहुंचने वाली है। अचानक बगल के कोच में ऊपर की सीट से कोई नीचे गिर गया। हल्ला मचा तो पता चला कि जो नीचे गिरा उसने शराबी पी हुई है। टीटी को बुलाया गया। पता चला वो अपने एक साथी के साथ बिना रिजर्वेशन यात्रा कर रहे हैं। कुछ देर तक लोग इसी किस्से पर बात करते रहे और फिर मैंने शुरू की चुनावी चर्चा।

'नेता अपनी पेंशन तो बंद नहीं करते लेकिन हमारी कर देते हैं'

बात शराब से होते हुए सैलरी तक पहुंची। सरकारी नौकरी कर रहे एक शख्स ने कहा नेता अपनी पेंशन तो बंद नहीं करते लेकिन हमारी कर देते हैं और मीडिया भी कुछ नहीं कहता। सरकार से ज्यादा उनकी शिकायत मीडिया से थी। दूसरे कोच में गई तो वहां एक बुजुर्ग मिले जींद से हैं और किसान हैं। वह कहते हैं कि पिछले बार किसानों ने बीजेपी को 10 की 10 सीट (हरियाणा की) दी, किसान ही बीजेपी को लाए, दो बार से लगातार हमने जोर लगाया और वोट दिया। लेकिन अब किसान और मजदूर नाराज है। उन्होंने कहा कि इस बार हम राहुल गांधी पर भरोसा कर रहे हैं कि वो कुछ बड़ा करेगा। हम तो बस उम्मीद ही कर सकते हैं, उम्मीद तो मोदी से भी की थी। ऊपर की सीट से नीचे झांककर बातें सुन रहे एक शख्स अब नीचे उतर आए। बोले पहले जनता गाड़ी चलती थी। सभी स्टेशनों पर रुकती थी। अब जो ट्रेन चल रही हैं उनमें एसी कोच बढ़ा रहे हैं लेकिन जनरल और स्लीपर डिब्बे कम करते जा रहे हैं। आम आदमी महंगी ट्रेन में कैसे बैठेगा। फिर कहा युवाओं को इजरायल भेज रहे हैं क्या भारत में रोजगार नहीं दे सकते। किसान को भी एमएसपी नहीं दी। ऊपर से ही झांकते एक शख्स ने ऊपर बैठे बैठे ही बोला एमएसी को लेकर इतना हल्ला हुआ पर हुआ क्या, किसानों को ही उलटा बोलने लगे। आगे कुछ पूछने पर उन्होंने कहा, मुझे बस इतना ही कहना है।

'किसान दिल्ली में बैठे कोई नहीं सुन रहा...'

ट्रेन में ही सफर कर रहे यूपी के रहने वाले आदेश कुमार कहते हैं कि एजुकेशन, किसान, बेरोजगारी यही मुद्दे हैं इसी पर वोट देते हैं लेकिन कोई पार्टी काम नहीं करती। पिछले चुनाव में भी यही सोचकर वोट दिया था। क्या यूपी में राम मंदिर मुद्दा है, ये पूछने पर कहते हैं कि राम मंदिर मुद्दा क्यों है, मंदिर तो बन गया। मंदिर तो आस्था का विषय है। लोग सरकार को वोट देंगे तो पूछेंगे कि बेरोजगारी बढ़ रही है, महंगाई बढ़ रही है, किसान दिल्ली में बैठे कोई नहीं सुन रहा, एमएसी लागू नहीं हुई। वेकेंसी नहीं निकली, पेपर लीक हो जाते हैं। इन मुद्दों पर किसी भी सरकार ने अच्छा काम नहीं किया है।

'इस बार मैं बदलाव चाहता हूं'

इटावा के रहने वाले जितेंद्र कुमार कहते हैं कि रोजगार मिलना चाहिए, स्वास्थ्य, गैस सिलेंडर महंगा हो गया है। बदलाव करेंगे नई सोच से वोट देंगे। सोनू भी इटावा से हैं। वह कहते हैं कि सरकार से परेशान हैं। इस बार मैं बदलाव चाहता हूं। इलाज सही से नहीं होता, ट्रांसपोर्ट लाइन में बुरा हाल है, किसान सब परेशान हैं। पिछली बार जो सोचकर वोट दिया था, उससे अलग सोच रहा हूं इस बार। उसी कोच में बैठे छोटे बताते हैं कि मेरा चाय का काम है। वह काफी नाराज दिखे, बोले यूपी में किसान परेशान है। किसान रात में भी नहीं सो पा रहा है। इतने आवारा पशु घूम रहे हैं, महंगाई बढ़ रही है। पहले इस सरकार के लिए वोट दिया था अच्छे दिन के लिए। पर आए नहीं। आवारा जानवर ने कितने किसानों को घायल कर दिया, पेट फाड़ दिए खेत में ही। हमारी चुनावी चर्चा के बीच ट्रेन ग्वालियर जंक्शन पर रुकी। लोगों से बात करने मैं भी प्लेटफॉर्म पर गई। पता ही नहीं चला ट्रेन चलनी शुरू हो गई। ट्रेन के साथ साथ दौड़ी और एक पैंसेंजर ने हाथ खींचकर ट्रेन पर चढ़ाया। आगे के सफर में चुनावी चर्चा के साथ ही इस बात का ख्याल भी कि प्लेटफॉर्म पर ज्यादा देर नहीं रुकना है।


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