मस्जिद में गुजरा बचपन, जीते तो पीएम मोदी संग बैठेंगे, क्रिकेटर से नेता बने यूसुफ पठान की कहानी

नई दिल्ली: 41 साल के यूसुफ पठान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में दो-दो वर्ल्ड कप (2007 टी-20, 2011 वनडे वर्ल्ड कप) जीतने वाली चैंपियन भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा थे। टीम इंडिया के लिए 57 वनडे और 22 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेलने के बाद अब वह पॉलिटिकल पिच पर छक्के-चौके उड़ाने की तैयारी में है। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को राज्य की सभी 42 लोकसभा सीटों के लिए जिन उम्मीदवारों की सूची जारी की है, उनमें क्रिकेटर यूसुफ पठान का भी नाम है, जो बहरामपुर सीट से प्रत्याशी बनाए गए हैं। यूसुफ पठान संघर्ष की भट्ठी में तपकर भारतीय टीम तक पहुंचे और अब एक और कड़ी परीक्षा उनका इंतजार कर रही है। गुजरात से आने वाले यूसुफ पठान आईपीएल में कोलकाता नाइटराइडर्स को दो बार चैंपियन बना चुके हैं, ऐसे में खुद को बाहरी नहीं बल्कि 'भारी बंगाली' बता रहे हैं।गुदड़ी के लाल ने किया कमालगुजरात के बड़ौदा (वडोदरा) के रहने वाले यूसुफ पठान पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान के बड़े भाई हैं। दोनों भाइयों का बचपन मस्जिद में बीता। छोटे से कमरे में पूरा परिवार रहा करता था। उनके पिता महमूद पठान मस्जिद में मुअज्जिन थे। घर की स्थिति अच्छी नहीं थी। गरीब माता-पिता अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर एक इस्लामिक इस्कॉलर बनाना चाहते थे, लेकिन यूसुफ ने अपनी दुनिया कहीं और ढूंढ ली थी, अपने छोटे भाई इरफान की ही तरह यूसुफ को भी बचपन से ही क्रिकेट का जुनून था। दोनों भाइयों के पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वो नए क्रिकेट किट खरीद सके।वर्ल्ड कप फाइनल में डेब्यूतेज गेंदबाज और स्विंग के मास्टर छोटे भाई इरफान पठान जहां 2003 में ही भारत के लिए टेस्ट डेब्यू कर चुके थे तो युसूफ को चार साल बाद मौका मिला। 2007 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर के पहले ही मैच में सिर्फ आठ गेंदों में 15 रन की बेखौफ पारी खेलकर इरादे जाहिर कर दिए। 2001-2002 सीजन में सौराष्ट्र की ओर से अपना रणजी ट्रॉफी खेलने वाले यूसुफ पठान बड़े-बड़े शॉट्स मारने के लिए मशहूर थे। उनके करियर का टर्निंग पॉइंट 2008 में आया, जब आईपीएल के ओपनिंग सीजन में राजस्थान रॉयल्स को चैंपियन बनाने के लिए उन्होंने कई आतिशी पारियां खेली। खराब फॉर्म और फिटनेस के चलते 2012 के बाद वह भारतीय टीम में नहीं चुने गए और फिर 2021 में सारे फॉर्मेट से संन्यास ले लिया। अब वह देश-विदेश में घूम-घूमकर फ्रैंचाइजी टी-20 लीग खेलते हैं।पीएम मोदी संग संसद में बैठेंगेममता बनर्जी ने इस बार कुछ मौजूदा सांसदों को उम्मीदवार नहीं बनाया है। पार्टी ने 16 मौजूदा सांसदों पर फिर से भरोसा जताया है। इस सूची में 12 महिलाओं का नाम शामिल है, जिन्हें टिकट दिया गया है। ऐसे में अगर यूसुफ पठान अपनी सीट जीतने में कामयाब रहते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संसद में बैठेगें। गुजरात के ही रहने वाले नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार वाराणसी से चुनावी मैदान पर हैं। बसीरहाट लोकसभा सीट से टीएमसी ने मौजूदा सांसद नुसरत जहां की जगह अपने पूर्व सांसद हाजी नुरुल इस्लाम को मैदान में उतारा है। टीएमसी ने लोकसभा से निष्कासित महुआ मोइत्रा को कृष्णानगर सीट से लगातार दूसरी बार उम्मीदवार बनाया है।


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