मणिपुर का वो अकेला बाजार जो केवल महिलाएं संचालित करती हैं, कर्तव्य पथ पर दिखाई गई जिसकी झांकी

नई दिल्ली: देश में एक ऐसा बाजार भी है जिसे सिर्फ महिलाएं संचालित करती हैं। ये बाजार मणिपुर (Manipur) में है। मणिपुर की राजधानी इंफाल (Imphal) में ‘मदर मार्केट’ नाम से ये बाजार 500 सालों से लग रहा है। आज देश की राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 75वें गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में इस बाजार की झांकी दिखाई गई। मदर्स मार्केट को खैरबंद बाजार या नुपी कैथल भी कहते हैं। मणिपुरी में इसे इमाकैथिल मार्केट कहते हैं। कई महिलाएं (Women Of Manipur) तो यहां पीढ़ियों से दुकानदार कर रही हैं। यहां हर तरह के आइटम बिकते हैं, जिसमें हैंडीक्राफ्ट सामान, खिलौने कपड़े, सौंदर्य प्रसाधन, खाने का सामान, मसाले, सब्जियां, मीट और वो सारे सामान बिकते हैं, जो घरों में इस्तेमाल होते हैं। इस बाजार में पुरुषों की किसी तरह की कोई भूमिका नहीं होती है।

साल 1786 में बना था बाजार

यह बाजार साल 1786 में बना था। ये वो समय था जब मणिपुर के सारे पुरुष चीन और बर्मा की सेनाओं से युद्ध में उलझे हुए थे। ऐसे में इस बाजार के संचालन का जिम्मा महिलाओं ने उठाया था। इसके बाद से अभी तक इस बाजार की कमान महिलाओं के हाथ में है। इमा बाजार का मतलब मां का बाजार होता है। इसे नुपी कीथल के नाम से भी जाना जाता है। इस बाजार में करीब 4 से 5 हजार महिला व्यापारी काम करती हैं। यहां सब्जी-फल से लेकर सभी घरेलू सामाना मिलता है।

यहां लगता है पूरा मार्केट

पहले तो ये बाजार शेड्स में लगा करता था, लेकिन फिर इंफाल म्युनिसपल कौंसिल ने यहां चार मंजिला का विशाल भवन बना दिया है, जिसमें सारा बाजार लगता है। इस बाजार का पहला जिक्र मणिपुर के गजेटियर में 1786 में महिला बाजार के रूप में हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, 1948-52 के बीच कुछ स्थानीय अमीर लोग कुछ अन्य व्यापारियों के साथ मिलकर इस बाजार के शेड्स को गिराना चाहते थे, लेकिन महिलाओं ने इसको कामयाब नहीं होने दिया। बाजार में लंच के समय अक्सर यहां की महिलाएं सामाजिक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करती हैं।

बड़े बाजारों में से एक

मदर मार्केट एशिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। इस बाजार में मछलियां, सब्जियां, बांस और धातुओं से बने शिल्प तथा अन्य वस्तुओं की बिक्री होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां महिलाएं प्रति वर्ष करीब 50,000 से लेकर 2 लाख रुपये तक की कमाई कर लेती हैं। ये बाजार सिर्फ बाजार न होकर एक प्रकार का लर्निंग सेंटर भी है, जो महिलाओं को बाजार में कम करना सिखाता है।


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