बाप रे, 20 हजार का चालान! फॉर्च्यूनर वाले के उड़ गए होश, बचने के लिए गजब बहाने बना रहे दिल्लीवाले
नई दिल्ली : रिंग रोड और एनएच-24 के टी पॉइंट के पास लाजपत नगर सर्कल के ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की चेकिंग एक टीम तैनात थी। उन्हें टास्क दिया गया थी कि अगर पेट्रोल की बीएस-3 और डीजल की बीएस-4 कैटिगरी के इंजन वाली कोई गाड़ी सड़क पर चलती दिखे, तो तुरंत उसे रोक कर उसका चालान काटे। चालान भी हल्का फुल्का नहीं, 20 हजार रुपये का। मगर यह काम इतना आसान नहीं था। भारी भरकम चालान से बचने के लिए लोग एक से एक बहाने बना रहे थे। कोई कह रहा था कि उन्हें बैन के बारे में पता ही नहीं था, तो कोई कह रहा था कि जब हमारे पास वेलिड पीयूसी है, तो फिर हम गाड़ी क्यों नहीं चला सकते। कोई किसी जरूरी काम की वजह से मजबूरी में गाड़ी निकालने का बहाना बना रहा था, तो किसी का कहना था कि हम तो बस बॉर्डर तक किसी काम से आए थे और यू टर्न लेने के लिए यहां तक आ गए थे। कुछ लोग ऐसे भी थे, जो पुलिसवालों को अपना रसूख दिखाकर यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि उन पर किसी बैन-वैन का कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। बैन से अनजान लोगों में ज्यादातर ऐसे थे, जो यूपी, हरियाणा या किसी अन्य राज्य में रजिस्टर्ड गाड़ियां चला रहे थे। बात करने पर पता चला कि दिल्ली के आरटीओ की तरह इन लोगों को संबंधित राज्य के परिवहन विभाग की तरफ से एसएमएस भेजकर ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई थी कि ग्रैप-4 के चलते वो अपनी गाड़ी अभी नहीं चला सकते। इसी वजह से कई लोग पाबंदी को लेकर वाकई में अनजान थे।चालान की रकम सुनते ही उड़े होशट्रैफिक पुलिसकर्मियों की टीम ने जैसे ही हरियाणा के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक फार्चूनर को रोका, तो उसमें बैठे शख्स ने कारण पूछा। ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने बताया कि आप डीजल की बीएस-4 इंजन वाली गाड़ी चला रहे हो। दिल्ली में ग्रैप-4 लागू है, जिसके तहत ये गाड़ी सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है। आपने नियम तोड़ा है, इसलिए चालान कटेगा। ड्राइवर ने जल्दबाजी में पूछा, ‘कितने का चालान कटेगा?’ जैसे ही ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने बताया, ‘20 हजार रुपये का’, यह सुनते ही ड्राइवर के होश उड़ गए। उसने हैरानी भरे लहजे में पूछा, ‘20 हजार रुपये का, क्या मजाक कर रहे हो सर?’ जब ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने दोबारा पुष्टि की, तो ड्राइवर बोला, ‘लेकिन मेरे पास तो वेलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट है।’ इस पर पुलिसवालों ने उसे समझाया कि बात पीयूसी की नहीं है। आपकी गाड़ी बीएस-4 डीजल इंजन की है, इसलिए नहीं चल सकती। काफी देर तक वह शख्स ट्रैफिक पुलिसवालों से बहस करता रहा। जब कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो उसने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए कुछ फोन लगाए और चालान से बचने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मीडिया की मौजूदगी को देखते हुए ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने भी कोई रियायत नहीं बरती और चालान काटकर ही उसे छोड़ा। चालान कटने के बाद भी घूमते मिलेकुछ देर बाद दिल्ली के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक स्कॉर्पियो आई। पुलिसवालों ने जैसे ही हाथ देकर रोका, तो ड्राइवर ने जेब से पर्ची निकालकर दिखाते हुए बोला, ‘साहब! हमारा चालान तो सुबह ही कट गया था।’ ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने चालान स्लिप चेक की, तो पता चला कि सुबह 11 बजे के करीब बाराखंभा रोड पर उस गाड़ी का चालान कटा, लेकिन इसके बावजूद गाड़ी सड़क पर चल रही थी। ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने ड्राइवर को सख्ती से समझाया, ‘चालान कटने का मतलब ये नहीं है कि आप गाड़ी चलाते रहो। चुपचाप गाड़ी घर ले जाकर खड़ी कर दो, वरना जब्त कर लेंगे।’ ड्राइवर बोला, ‘सर! कुछ काम निपटाना था, उसी में देरी हो गई। अब बस घर ही जा रहा हूं।’ दोस्ती निभाने के चक्कर में कटा चालानयूपी के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक कार को रोकने पर निक्कर टी-शर्ट पहने दो युवक बाहर निकले। जब उन्हें भी बैन के बारे में बताकर कहा गया कि 20 हजार रुपये का चालान कटेगा, तो वो बहानेबाजी करने लगे। तभी एक युवक के पास उसके दोस्त का फोन आया। उसने झल्लाते हुए कहा, ‘यार फोन रख। तेरे चक्कर में मेरा चालान कट गया। मैं तुझे कह रहा था कि तू खुद ही इधर आ जा।’ उसने काफी मिन्नतें करते हुए कहा कि मैं सिर्फ अपने दोस्त को पिक करके वापस जाने वाला था, लेकिन ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने एक नहीं सुनी और चालान काट दिया।
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