जब CM शिवराज ने MP को बना दिया मुंबई! एक घंटे के डांस पर खर्च किए थे 16 लाख रुपये

दतिया: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। शिवराज सिंह चौहान करीब 18 साल से मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे हैं। हालांकि इस बार बीजेपी नेतृत्व ने उन्हें मध्य प्रदेश चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। लेकिन विपक्षी दल शिवराज सिंह चौहान की सरकार में हुई खामियों को ही मुद्दा बनाकर कैंपेन में जुटी है। शिवराज इतने लंबे समय से राज्य की सत्ता पर काबिज हैं कि आम वोटर भी कहीं ना कहीं उन्हीं की सरकार से जुड़ी किस्से कहानियों पर बातें करते हुए दिख रही हैं। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान सरकार में साल 2011 का एक किस्सा है, जो उस वक्त मीडिया में खूब सूर्खियां बटोरी थी।

क्या है वह किस्सा

बात 2011 की है। शिवराज सरकार भव्यता के साथ मध्य प्रदेश महोत्सव का आयोजन कर रही थी। मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर करोड़ों रुपये खर्च करने का चलन लंबे समय से चलता रहा है। लेकिन उस साल मीडिया में इसकी खूब चर्चा हुई। 2011 में आयोजित मध्य प्रदेश महोत्सव समारोह का आयोजन करने की जिम्मेदारी संस्कृति विभाग को सौंपी गई। इस आयोजन पर विभाग ने 2 करोड़ 67 लाख रुपये खर्च कर डाले। इस आयोजन की इतनी चर्चा इसलिए हुई क्योंकि इसमें एक डांसर को एक घंटे के प्रोग्राम के लिए 16 लाख रुपये का बिल पे किया गया। यह डांसर कोई और नहीं बल्कि मशहूर एक्ट्रेस और बीजेपी की नेता हेमा मालिनी थीं, जो बाद में मथुरा लोकसभा सीट से सांसद बनीं। मध्य प्रदेश विधानसभा में हुई बहस के रेकॉर्ड के मुताबिक हेमा मालिनी को एक घंटे के डांस के लिए 16 लाख रुपये दिए गए। वहीं आशो भोसले को 64 लाख रुपये का भुगतान हुआ। इस बात की उस वक्त खूब आलोचना हुई। अजय सिंह ने विधानसभा में इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया। वरिष्ठ पत्रकार दीपक तिवारी की किताब राजनीतिनामा मध्य प्रदेश के मुताबिक इस विवाद के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने 2012 में एक बार फिर से हेमा मालिनी को दतिया महोत्सव के लिए आमंत्रित किया था। हेमा मालिनी को जब ग्वालियर से दतिया तक 75 किलोमीटर की यात्रा करने में 3 घंटे लगे तो वह बहुत नाराज हो गईं। दरअसल, यह रोड नेशनल हाइसे है। उस वक्त केंद्र में यूपीए की सरकार होने के चलते इसकी मरम्मत नहीं हो पा रही थी। हेमा मालिनी के नाराज होने की बात ने इतना तूल पकड़ा कि राज्य की कैबिनेट में एक अनौपचारिक प्रस्ताव में तय किया गया कि पूरी कैबिनेट इसका विरोध करने के लिए दिल्ली जाएगी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलेगी। दिलचस्प बात यह है कि केंद्र में बीजेपी की लंबे समय तक सरकार चलने के बाद भी इस रोड की मरम्मत नहीं हो पाई।


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