बाढ़ से बचाए गए बंदर के 2 बच्चों ने इंसानों को भी सिखा दिया, देखिए दूध वाली कहानी

नई दिल्ली: अभी दिल्ली में बाढ़ आई थी। गुजरात में भी कुछ इलाके प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के पानी से जब इंसानों की जिंदगी इतनी बदहाल हो सकती है तो जरा सोचिए कि बेजुबान जानवरों का क्या हाल होता होगा। उनका तो अपना कोई पक्का मकान या खेती भी नहीं होती है। वे हम इंसानों के भरोसे या प्रकृति पर निर्भर होते हैं। आपने वीडियो भी देखा होगा जब दिल्ली-नोएडा में यमुना का पानी बढ़ने पर वन विभाग, एनजीओ और दूसरे विभागों के कर्मचारी जानवरों को बचाते देखे गए। इस बीच, सोशल मीडिया पर बंदरों के दो बच्चों का वीडियो शेयर हो रहा है। यह तस्वीर आपकी आंखें नम कर देगी। यह तस्वीर सिखाती है कि मुश्किल परिस्थितियों में हम इंसान कैसे लड़ पड़ते हैं लेकिन ये छोटे से बेजुबान बंदर शांत बने रहे। इन्होंने अपनी नहीं, दूसरे की परवाह की। यह तस्वीर बाढ़ प्रभावित इलाके की है। कैसे भी बचकर ऊंचाई वाली जगह पर बंदर के दो बच्चे सहमे हुए बैठे थे। वे एक दूसरे को सांत्वना दे रहे थे। दिलासा दे रहे थे कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। एक शख्स दूध लेकर आता है। पहले छोटे ने दूध पिया फिर बड़े को पीने का इशारा किया। अब जरा वीडियो को ध्यान से देखिए। जब तक छोटा दूध पी रहा होता है, बड़ा अपने अंगूठे को ही मुंह में डाले सिर झुकाए रहता है। वह अपनी भूख और प्यास को छोटे के लिए न्योछावर कर देता है। उसे शायद अंदेशा था कि छोटे को ही दूध मिल पाएगा और उसकी जान बच जाएगी। इसीलिए वह खामोश बैठा रहा। यह मानकर कि यही नियति है। खुद को सांत्वना देने के लिए वह मुंह में अंगूठा डालकर चूसता रहा। एक तरह से वह खुद को तसल्ली दे रहा था। अब जरा इन बंदरों की जगह दो इंसानों को रखकर सोचिए, फर्क पता चल जाएगा। भूख तो बड़े को भी लगी थी लेकिन वह चाहता था कि पहले छोटे की जान बच जाए। वह तब तक खामोश रहा जब तक कि छोटे की भूख-प्यास नहीं मिटी। सोशल मीडिया पर लाखों लोग इस वीडियो को देख चुके हैं। कई लोगों ने लिखा है- इंसानियत जिंदा है, उस भले इंसान को धन्यवाद है। इससे बड़ा पुण्य नहीं हो सकता है।


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