पत्नी पर अभद्र टिप्पणी! जाने दो चुनाव है... और अपने मंत्री को Shivraj Singh Chouhan ने दे दी थी माफी

भोपालः चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां और नेता जाने क्या-क्या करते हैं। वोट पाने के लिए मतदाताओं के सामने मिन्नतें करने से लेकर तमाम वादे करते हैं। कई बार तो उन्हें अपनी मान-मर्यादा भी ताक पर रखनी पड़ती है। ऐसा ही एक मामला 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले देखने को मिला था जब मुख्यमंत्री को अपनी पत्नी पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मंत्री को माफ करना पड़ा था।

पहले कैबिनेट से बाहर, फिर वापसी

2013 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवराज की कैबिनेट में विजय शाह आदिम जाति और अनुसूचित कल्याण मामलों के मंत्री थे। उन्होंने झाबुआ में एक सरकारी कार्यक्रम में डबल मीनिंग वाला भाषण दिया था। इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह पर भी आक्षेप किया था। इस पर जमकर बवाल हुआ था। महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने राज्ट में कई स्थानों पर विजय शाह का पुतला दहन कर उनके इस्तीफे की मांग की थी। दो दिन तक चले हंगामे के बाद उन्हें अंततः इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन शाह ज्यादा दिनों तक मंत्री पद से दूर नहीं रहे। करीब चार महीने बाद ही शिवराज ने उन्हें माफ कर दिया और दोबारा कैबिनेट में शामिल कर लिया।

क्या कहा था शाह ने

विजय शाह झाबुआ के सरकारी कन्या विद्यालय में समर कैंप के उद्घाटन के लिए गए थे। उनसे छात्राओं ने ट्रैक सूट की मांग कर दी। इसी का जवाब देते हुए शाह ने विवादास्पद कमेंट किया था। सैकड़ों छात्राओं और शिक्षकों के सामने शाह ने कहा था कि पहला-पहला जो मामला होता है, उसे इंसान भूलता नहीं है। भूलता है क्या। बच्चे समझ गए होंगे।

पार्टी ने भी माना था दोषी

विजय शाह ने इस दौरान हास-परिहास में मुख्यमंत्री की पत्नी का भी नाम ले लिया था। बयान पर बवाल मचने के बाद पार्टी ने पूरे मामले की जांच करवाई। जांच में उन्हें भद्दा बोलने का दोषी पाया गया था। अश्लील बयान देने के चलते उन्हें कैबिनेट से बाहर कर दिया गया था।

शिवराज ने इसलिए किया माफ

विजय शाह का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा है। निमाड़ और बैतूल के गोंड आदिवासियों के बीच उनके परिवार का अच्छा खासा प्रभाव है। प्रदेश के 21 जिलों की 47 विधानसभा सीटों पर गोंड जनजाति बड़ी संख्या में है। बीजेपी को डर इस बात का था कि विजय शाह के चलते उसे आदिवासी वोटों का नुकसान हो सकता है। पार्टी के दबाव में शिवराज को उन्हें माफ करना पड़ा। चुनाव से पहले जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान उन्होंने विजय शाह को गले लगा लिया। शिवराज ने कहा कि विवादास्पद हास-परिहास में शाह का भाव गलत नहीं था।


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