मुंबई के कुर्ला के नाम की है बड़ी गजब कहानी, जहा 'केकड़ा' वाला कनेक्शन जानिए

नई दिल्ली: देशभर में कई मशहूर जगहें हैं, जो किसी न किसी खासियत के लिए जानी जाती है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी ऐसी कई जगहें हैं। आज हम मुंबई के ऐसे ही एक इलाके 'कुर्ला' के बारे में बता रहे हैं, जो अपने अनोखे नाम के लिए मशहूर है। आपने फिल्मों में कुर्ला का नाम जरूर सुना होगा, लेकिन कभी सोचा है कि आखिर इसका नाम कैसे पड़ा। आज हम कुर्ला इलाके की कहानी आपको बताने जा रहे हैं।नाम के पीछे की कहानीवैसे हो कुर्ला के नाम के पीछे कई कहानियां प्रचलन में हैं। इंटरनेट पर Straying Around नाम के ब्लॉग को चलाने वाले अबोध ने इसके नाम की कहानी बताई है। उन्होंने बताया कि मुंबई के कुर्ला का नाम 'केकड़े' की वजह से पड़ा है। दरअसल केकड़े को मुंबई की लोकल भाषा मराठी में 'कुर्ली' कहते हैं। पहले इस इलाके में काफी दलदल था। इस वजह से यहां काफी मात्रा में केकड़े मिलते थे। इन्हीं के नाम पर इलाके का नाम कुर्ली पड़ गया और धीरे-धीरे लोग इसे कुर्ला कहने लगे।पुर्तगाली और अंग्रेजों ने किया शासनअब कुर्ला मुंबई का प्रसिद्ध उपनगर है। यह बॉम्बे नगर निगम के वार्ड 'एल' जोन 5 के अंतर्गत आता है । कुर्ला रेलवे स्टेशन काफी व्यस्त स्टेशनों में से एक है। 1534 में इस इलाके पर पुर्तगालियों ने कब्जा कर लिया। बाद में इस द्वीप को औपचारिक रूप से 1782 की सालबाई की संधि में ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया गया था। 1805 में कुर्ला को सायन कॉजवे द्वारा बॉम्बे द्वीप पर सायन से जोड़ा गया था । कुर्ला 1890 तक ब्रिटिश राज के दौरान बॉम्बे और ठाणे के बीच ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे का एक प्रमुख स्टेशन था , जो 1853 में ब्रिटिश भारत में पहली रेलवे लाइन थी।कपास मिलों के लिए था मशहूरकुर्ला इलाके में दो बड़ी कपास मिलें थीं। इन मिलों में हजारों लोग काम किया करते थे। कुर्ला की लगभग आधी आबादी इन्हीं मिलों पर निर्भर थी, जबकि बाकी लोग मछली पकड़ने और नमक बनाने का काम करते थे। कुर्ला इलाके में मुंबई का प्रसिद्ध होली क्रॉस चर्च है, जिसे पुर्तगाली शासन के दौरान बनाया गया था।कैसे पहुंचे कुर्ला?मुंबई के कुर्ला में फेमस फोनिक्स मार्केटसिटी मॉल है, यहां आप शॉपिंग का कर सकते हैं। इसके अलावा कोहिनूर सिटी भी इसी इलाके में है, जहां कई मशहूर हस्तियां रहती हैं। ये साइट पहले प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स नामक एक मोटरकार निर्माण कंपनी थी जो यहां अपनी प्रसिद्ध पद्मिनी कार का निर्माण करती थी। इसके साथ ही इसी इलाके में कुरेश नगर भी है जिसे कसाई-वाड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र में भैंसों और सांडों का बड़ा बाजार था और कसाई पेशे से ताल्लुक रखने वाले परिवार यहां रहते हैं। कुर्ला में मुंबई के सभी हिस्सों से सड़क और ट्रेन द्वारा पहुंचा जा सकता है।


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