अंतरिक्ष में होने जा रही सोने-चांदी की 'बारिश', आपस में टकराए ये खास सितारे तो होगा चमत्कार

वॉशिंगटन: अंतरिक्ष रहस्यों से भरा है। खगोलविदों ने अब असाधारण रूप से एक दुर्लभ तारा प्रणाली की खोज की है, जो एक शक्तिशाली विस्फोट को ट्रिगर कर सकता है। इसके भविष्य में एक किलोनोवा बनने की संभावना है। इस विस्फोट के होने से अंतरिक्ष में 'सोने की बौछार' होगी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 10 अरब सिस्टम में एक ही इतना दुर्लभ होता है। अनुमान है कि हमारे सौर मंडल में ऐसे सिर्फ 10 सिस्टम मौजूद हैं। अमेरिका के विशेषज्ञों का कहना है कि जब दो न्यूट्रॉन सितारे का आपस में विलय हुए तो एक बड़ा धमाका वैज्ञानिकों ने देखा।शोधकर्ताओं ने बुधवार को पहली बार एक किलोनोवा विस्फोट की संभावना जताई है। इस विस्फोट से एक आग का गोला बना और चमकदार पदार्थ उनकी अपेक्षाओं से भी तेज अंतरिक्ष में फैल गया। यह तारा समूह CPD-29 2176 के रूप में जाना जाता है, जो पृथ्वी से लगभग 11,400 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। नासा के नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी ने इसे देखा है। दोनों न्यूट्रॉन सितारों का द्रव्यमान हमारे सूर्य से लगभग 2.7 गुना है। ये दोनों तारे आपस में टकराने से पहले अरबों साल तक एक दूसरे की परिक्रमा करते रहे।

वैज्ञानिकों को मिली नई जानकारी

चिली में मौजूद 1.5 मीटर के टेलीस्कोप से खगोलविदों को यह पता चल सका कि सितारों की टक्कर एक किलोनोवा बनाएगी। CPD-29 2176 असामान्य है। ऐसा इसलिए क्योंकि खगोलविदों ने हमेशा सोचा था कि एक किलोनोवा के दौरान सबसे घना तारा दूसरे को सिस्टम से बाहर कर देता है। लेकिन मौजूदा न्यूट्रॉन स्टार ने ऐसा नहीं किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक किलोनोवा बनाने के लिए दूसरे सितारे को भी अल्ट्रा-स्ट्राइप्ड सुपरनोवा के रूप में विस्फोट करने की जरूरत होगी, ताकि दोनों न्यूट्रॉन सितारे आपस में टकरा सकें। दो से अंतरिक्ष में अगर एक भयानक विस्फोट हो, तो यह किलोनोवा कहलाता है।

सोना-चांदी की होगी बारिश!

अंतरिक्ष में होने वाला सुपरनोवा विस्फोट पारंपरिक तौर पर अपने करीबी तारे को सिस्टम से बाहर कर देता है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक जब न्यूट्रॉन सितारों की आपस में टक्कर होती है तो किलोनोवा विस्फोट बनता है जिससे उच्च-ऊर्जा कण तेजी से बाहर निकलते हैं। यहां इतनी गर्मी होगी कि इनसे एक रेडियोएक्टिव चमकदार प्रकाश पैदा होगा, जो बड़े पैमाने पर सोना, चांदी और यूरेनिय जैसे महत्वपूर्ण तत्वों से भरा होता है। किलोनोवा विस्फोट के बारे में पहली बार 1974 में प्रस्ताव दिया गया था और 2013 में इसकी पुष्टि की गई थी।


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