अमेरिका में कपल को नहीं मिली गर्भपात की इजाजत, जन्‍म के बाद बच्‍चे को मरते हुए देखेंगे मां-बाप

फ्लोरिडा: अगले कुछ हफ्तों में अमेरिकी राज्‍य फ्लोरिड के एक कपल को अपने बच्‍चे को बड़े ही दर्दनाक मौके पर मिलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। यह कपल बच्‍चे के पैदा होने के बाद उसे मरते हुए देखेगा। इसकी वजह है सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिया गया वह आदेश जो गर्भपात से जुड़ा है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में गर्भपात के अधिकार को खत्‍म कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जुलाई में फ्लोरिडा ने नया कानून बनाया। इस कानून के तहत 15 हफ्तों के बाद गर्भपात की मंजूरी नहीं दी जा सकती है। यह दंपति गर्भपात कराना चाहता था क्‍योंकि गर्भ में पल रहा शिशु एक जानलेवा बीमारी का शिकार है। क्‍या है सारा मामला फ्लोरिडा ने जो कानून बनाया उसकी पहली पीड़‍िता बनी हैं डेब्राह डॉर्बट और उन्‍हें गर्भपात की प्रक्रिया के लिए काफी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साल 1973 का रो वी वेड फैसला बदल दिया था और गर्भपात पर बैन लगा दिया था। वॉशिंगटन पोस्‍ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक डेब्राह और उनके पति ली अपने दूसरे बच्‍चे का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे जो कि गर्भ में था। उनके डॉक्‍टरों ने उन्‍हें बताया कि शिशु को एक खतरनाक बीमारी है जिसे पॉटर सिंड्रोम के तौर पर जाना जाता है। डेब्रॉह और उनके पति गर्भपात चाहते थे लेकिन डॉक्‍टरों ने ऐसा करने से मना कर दिया। डॉक्‍टरों ने फ्लोरिडा के उस नए कानून का हवाला दिया जिसे जुलाई 2022 में लागू किया गया है। क्‍या है पॉटर सिंड्रोम पॉटर सिंड्रोम एक जानलेवा बीमारी है जो गर्भ के विकास से जुड़ी होती है। इस बीमारी में शिशु की किडनी का विकास और उसका फंक्‍शन अजीब तरह से होता है। नतीजतन गर्भावस्था के दौरान भ्रूण कितना एमनियोटिक द्रव घेर पाता है, इस पर खासा असर पड़ता है। इस सिंड्रोम को जानलेवा बताया जाता हे क्‍योंकि खराब किडनी वाले शिशु अपने शरीर से खतरनाक जहरीले पदार्थों को निकाल नहीं पाते हैं। ऐसे में किडनी फेल हो जाती है। साथ ही साथ गर्भ में एमनियोटिक द्रव न होने की वजह से बच्चे का जन्म सांस लेने की क्षमता के बिना होता है। फ्लोरिडा का मुश्किल कानून फ्लोरिडा में पिछले साल जो कानून लागू किया गया है, उसे भ्रूण और शिशु मृत्‍यु दर कम करने वाले कानून के तौर पर जाना जा रहा है। इसमें 15 हफ्तों के गर्भ के बाद गर्भपात नहीं कराया जा सकता है। गर्भपात की मंजूरी तभी मिल सकती है जब दो डॉक्‍टर लिखकर दें कि भ्रूण असामान्यता और व्यवहार्यता तक नहीं पहुंचा है। पिछले साल नवंबर में, जब डेब्राह और ली को अपने बच्चे में इस सिंड्रोम का पता चला था तो एक डॉक्‍टर ने उन्‍हें बताया कि कुछ माता-पिता पूर्ण अवधि तक जारी रखना चुनते हैं। जबकि बाकी अन्य सर्जरी या समय से पहले प्रसव के जरिए गर्भावस्था को खत्‍म करने का ऑप्‍शन चुनते हैं। कपल ने कानून को बताया डरावना डॉक्टर ने उन्‍हें कहा कि वह नए कानून बारे में मेडिकल एक्‍सपर्ट्स से सलाह लेंगे। मगर डेब्रॉह और उनके पति ने फैसला किया जितनी जल्दी हो सके गर्भावस्था को खत्‍म कर देना चाहिए। ऐसे सिंड्रोम वाले बच्चे अक्सर पैदा होने से पहले ही मर जाते हैं या उनके प्रसव के बाद मिनटों या घंटों के भीतर दम घुटने से मौत हो जाती है। मगर डेब्रॉह को उनके डॉक्‍टर ने बताया कि गर्भ सिर्फ 28 से 32 हफ्तों के अंदर ही खत्‍म किया जा सकता है। लेकिन दोनों को 37वें हफ्ते यानी पूर्ण अवधि के करीब गर्भावस्था को खत्‍म करने के लिए इंतजार करना होगा। इस कपल ने नए गर्भपात कानून को डरावना करार दिया है।


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