दिल्ली में 14 साल के ब्रेन डेड बच्चे के लिवर से दो लोगों को नई जिंदगी, नवंबर में तीसरी मंजिल से गिर गया था

नई दिल्ली: वह सिर्फ 14 साल का था। उत्तराखंड का रहने वाला यह बच्चा एक दिन अपने घर की तीसरी मंजिल से गिर गया। डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। उसे दिमाग और छाती में काफी चोटें आई थीं। लेकिन उस 14 साल के बच्चे और उसके परिवार वालों को भी नहीं पता था कि उसके शरीर का महत्वपूर्ण भाग लीवर किसी को जिंदगी भी दे सकता है। लेकिन यह मुमकिन हुआ है। दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों के प्रयास ने उस बच्चे के लीवर से दो लोगों को नया जीवन मिला है। गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती एक 9 साल के बच्चे औ एक 54 साल के शख्स को उस बच्चे के लीवर से नया जीवन मिला है। किन दो मरीजों को 14 साल के लड़के से मिला नया जीवन दिल्ली के इंद्रप्रस्थ में स्थित अपोलो अस्पताल में लीवर ट्रांसप्लांट विभाग में सीनियर कंस्लटेंट के पद पर काम करने वाले डाक्टर नीरव गोयल ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी है। नीरव ने कहा कि पहला मरीज राजदीप मंडल Alagille सिंड्रोम से जूझ रहा है। इस रेयर जेनेटिक डिसऑर्डर में मरीज कि पित्त नलिकांओं में असामान्यताएं दिखने लगती हैं। इसके चलते उसका लीवर डैमेज हो गया है। 9 साल के इस बच्चे को बीते एक साल से लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत थी। नीरव गोयल ने आगे बताया कि दूसरे मरीज शमीन भी कई सालों से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। बीते 2 साल में शमीन को लीवर संबंधी समस्या के चलते कई बार एडमिट कराया जा चुका है। लीवर की बिगड़ती स्थिति के चलते उनके अंदर एसिट्स बनने लगे थे। इस स्थिति में पेट के आस-पास एक द्रव इकट्ठा होने लगता है। इसके अलावा पैरों में भी सूजन देखी जा सकती है। डॉक्टर नीरव गोयल ने आगे बताया कि शमीन को किडनी सहित और भी समस्याएं थीं। इतना ही नहीं लीवर ट्रांसप्लांट से 3 महीने पहले उन्हें टीबी की समस्या भी हो गई थी। 9 साल के राजदीप के पिता ने क्या बताया राजदीप मोंडल के पिता तपन मोंडल ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि हम कोलकाता में बिजली की दुकान चलाते हैं। मेरे परिवार में कोई भी उपयुक्त डोनर नहीं था। 14 साल के बच्चे को धन्यवाद करते हुए तपन ने कहा कि अगर इस बच्चे के परिवार ने लीवर ट्रांसप्लांट की अनुमति नहीं दी होती तो शायद मेरे बच्चे की जान नहीं बच पाती। अब मेरा बच्चा रिकवरी के बाद स्कूल जा सकता है और अपने दोस्तों के साथ खेल भी सकता है। पिता तपन ने आगे कहा कि राजदीप ने इस बीमारी से जूझने के बाद क्लास 1 के बाद से स्कूल जाना बंद कर दिया था। राजदीप की मेडिकल कंडीशन पर बोलते हुए डॉक्टर सिब्बल ने कहा कि उस बच्चे को पीलिया के साथ खुजली भी होती थी। धीरे-धीरे यह खुजली बढ़ने लगी और स्थिति खराब होने लगी। इससे उसके सोने-उठने की टाइमिंग पर भी प्रभाव पड़ने लगा। साल 2014 में पता चला कि राजदीप को Alagille सिंड्रोम है। जिसके चलते उसे लीवर सिरोसिस और लीवर फेल होने का भी खतरा था। बीते कुछ सालों से उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था।


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