भारत के साथ अच्‍छे रिश्‍ते चाहता है चीन... तवांग झड़प के बाद चीनी विदेश मंत्री वांग यी बोले

बीजिंग: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि उनका देश बेहतर द्विपक्षीय संबंधों के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। वांग का यह बयान नौ दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत-चीन की सेनाओं के बीच हुए टकराव के बाद आया है। वांग ने साल के अंत में होने वाले एक रिव्‍यू कार्यक्रम के दौरान यह बात कही है। भारत और चीन के संबंध साल 2020 से ही खराब चल रहे हैं। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद उसी साल गलवान में हुई हिंसा ने रिश्‍तों को और बिगाड़ दिया था। मगर अब चीन एलएसी के दूसरे हिस्‍सों पर भी तनाव पैदा करने की कोशिशें कर रहा है। पिटाई के बाद आया बयान वांग जो कि चीन की सत्‍ताधारी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के पोलित ब्‍यूरो के सदस्‍य भी हैं, उन्‍होंने एक सम्‍मेलन में कहा, 'भारत और चीन ने सैन्‍य और राजनयिक माध्‍यमों से संपर्क बरकरार रखा है। दोनों देश सीमाई इलाकों पर शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं।' चीन के विदेशी संबंधों पर आधार‍ित इस आयोजन में वांग के भाषण को विदेश मंत्रालय की तरफ से रविवार को रिलीज किया गया है। सूत्रों की मानें तो तवांग में नौ दिसंबर को जो झड़प हुई उसके पीछे पीएलए की वेस्‍टर्न थियेटर कमांड का हाथ था। जो टकराव हुआ था उसमें भारतीय सैनिकों ने बहुत बुरी तरह से चीनी सैनिकों को पीटा था। युद्धाभ्‍यास से खिसियाया चीन अरुणाचल प्रदेश के तवांग के यांगत्‍से में भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने थीं। करीब 300 चीनी सैनिकों ने जब भारत की सीमा में दाखिल होने की कोशिशें की थीं। भारतीय सेना के सूत्रों की मानें तो तवांग में हुए टकराव में चीन के काफी सैनिक घायल हुए हैं। जबकि घायल भारतीय सैनिकों की संख्‍या काफी कम है और उन्‍हें हल्‍की चोटें आई हैं। कहा जा रहा है कि हाल ही में उत्‍तराखंड के औली में एलएसी के करीब भारत और अमेरिका के सैनिकों ने एक युद्धाभ्‍यास किया था। चीन को इसी युद्धाभ्‍यास पर खासी आपत्ति थी और उसने अपनी खिसियाहट तवांग में निकाली। चीन का बयान चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से इस पूरे मामले पर जो बयान दिया गया, वह भी हैरान करने वाला था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता वांग वेनबिन ने कहा है कि एलएसी पर वर्तमान स्थिति स्थिर है। उन्‍होंने भारत को सलाह दी है कि वह दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का सम्‍मान करे और शांति कायम करने में मदद करे।झड़प के बाद ही चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (PLA) की तरफ से एक मिलिट्री ड्रिल का आयोजन किया गया था। दक्षिण पश्चिमी चीन के शिजांग में हुई इस ड्रिल के दौरान रॉकेट फायर करने से कई और हथियारों का प्रयोग किया गया था।


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