ब्रिटेन में पहली बार अल्पसंख्यक रह गए ईसाई, बिना किसी धर्म के लोग ज्यादा खुश, तेजी से बढ़ रहे मुसलमान

लंदन : ब्रिटेन और वेल्स में अब ईसाइयों की आबादी आधी से भी कम रह गई है। मंगलवार को जारी जनगणना आंकड़ों में यह बात सामने आई है। यह ब्रिटेन में धर्मनिरपेक्षता की ओर बढ़ते ऐतिहासिक झुकाव को दिखाता है। यह जनगणना 2021 में की गई थी जो 10 साल में एक बार होती है। ईसाइयों की घटती आबादी के आंकड़े ऋषि सुनक के ब्रिटेन के पहले हिंदू प्रधानमंत्री बनने के करीब एक महीने बाद सामने आए हैं। ये आंकड़े मुस्लिम आबादी में एक अहम इज़ाफे को भी दिखाते हैं। ऑफिस ऑफ नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) ने कहा कि 'ईसाई' के बाद दूसरे नंबर पर सबसे अधिक लोग 'बिना किसी धर्म' के हैं। यॉर्क के आर्कबिशप स्टीफन कॉटरेल ने कहा कि यह कोई 'बड़ी हैरानी' की बात नहीं है कि समय के साथ ईसाइयों की आबादी घट रही है। लेकिन उन्होंने कहा, 'यूरोप में कॉस्ट ऑफ लिविंग के संकट और युद्ध का सामना कर रहे लोगों को अभी भी 'आध्यात्मिक जीविका' की आवश्यकता है।' ? ब्रिटेन और वेल्स के करीब 27.5 मिलियन लोग या 46.2 फीसदी आबादी ने खुद को ईसाई बताया। यह आंकड़ा 2011 से 13.1 फीसदी कम है। 'धर्मनिरपेक्ष' लोगों की संख्या 12 अंक बढ़कर 37.2 फीसदी या 22.2 मिलियन पहुंच गई है। वहीं मुसलमानों की आबादी 3.9 मिलियन या 6.5 प्रतिशत है जो पहले 4.9 प्रतिशत थी। इसके बाद हिंदू 10 लाख, सिख 524,000, बौद्ध 273,000 और यहूदी 271,000 हैं। यूके की सत्ता पहले हिंदू पीएम के हाथ में ऋषि सुनक के प्रवक्ता ने जनगणना के आंकड़ों पर कहा, 'जाहिर है कि ब्रिटेन विविधताओं वाला देश है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए। इसमें धर्म की विविधता भी शामिल है।' ऋषि सुनक ने 24 अक्टूबर को कंजर्वेटिव पार्टी के नेता के रूप में लिज ट्रस को पीएम रेस में हराया था। उसी दिन ब्रिटेन में हिंदुओं ने दिवाली मनाई थी। अगले दिन 10 डाउनिंग स्ट्रीट में नए प्रधानमंत्री का पहला औपचारिक कार्यक्रम 'दिवाली रिसेप्शन' था।


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