वासना की आग और फ्रिज में पिता की लाश... दिल्ली में रिश्तों के खून की ये कहानियां बड़ी डरावनी हैं

नई दिल्ली: अपने तो अपने होते हैं... वैसे तो यह एक फिल्मी गाना है लेकिन रिश्तों का यथार्थ बताता है। हालांकि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से एक के बाद एक कई घटनाएं घटी हैं, उससे लोगों को अब 'अपनों' से ही डर लगने लगा है। गर्लफ्रेंड, बेटी ही नहीं अब पिता भी सुरक्षित नहीं हैं। दो हफ्ते पहले श्रद्धा की हत्या कर शव के 35 टुकड़े करने वाली खबर से पूरा देश हिल गया था। लेकिन आरोपी आफताब के चेहरे पर पछतावे का कोई भाव नहीं है। ज्यादा दिन नहीं हुए, मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर लाल सूटकेस में एक लड़की की लाश मिली थी। दिल्ली के बदरपुर में उसके पिता ने ही उसकी हत्या कर दी थी। अपने जिगर के टुकड़े के कत्ल में मां ने भी पूरा साथ दिया। आज पता चला है कि पांडव नगर में (Pandav Nagar) एक महिला ने अपने बेटे के साथ मिलकर अपने सुहाग को मिटा दिया। उन्होंने भी शव के टुकड़े किए और फ्रिज में रखकर एक-एक हिस्से को ठिकाने लगाया। इसमें मृतक के अवैध संबंधों का भी पता चला है। गांव और शहर में अलग-अलग शादियां करने के बाद वह बहू पर भी बुरी नजर रखता था। रिश्तों के खून की ये कहानियां डरा रही हैं। जानवरों, पड़ोसियों, रास्ते में मिलने वाले लोगों से अगर कोई बुरा बर्ताव करता है तो उसे इंसानियत की मिसाल देकर नसीहत दी जाती है लेकिन अगर कोई 'अपना' ही जान का दुश्मन बन जाए तो रिश्ते-नाते और परिवार का महत्व ही क्या रह जाएगा? वजह कुछ भी हो सकती है। नाराजगी, झगड़ा, प्रेम विवाह... लेकिन किसी की जान के पीछे लोग क्यों पड़ जाते हैं? इंसान को सामाजिक प्राणी कहा जाता है। वह एक दूसरे से प्रेम और सौहार्द्र के साथ रहना पसंद करता है। इंसान और जानवरों में एक बड़ा अंतर भावनाओं का भी होता है। इंसान को हर रिश्ते की अहमियत पता होती है लेकिन जानवर अपना शरीर देखता है। तो क्या हम जानवर बनते जा रहे हैं? श्रद्धा केस में मनोचिकित्सक और अन्य एक्सपर्ट कह रहे थे कि महिलाओं को हर चीज के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति से ऊपर उठना चाहिए। तब कहा गया था कि श्रद्धा को आफताब से रिश्ते पहले ही खत्म कर लेने चाहिए थे। लेकिन पांडव नगर हत्याकांड के बाद अब सवाल उठ रहा है कि इंसान भरोसा किस पर करे? हालांकि सवालों के घेरे में मृतक अंजन दास का कैरेक्टर भी है लेकिन हत्या को जायज नहीं ठहराया जा सकता। वारदात नंबर 1: मां-बेटे ने काट डालानवंबर के दूसरे हफ्ते में श्रद्धा हत्याकांड का खुलासा हुआ था। महीना अभी बीता नहीं था कि आज उसी तरह का एक और केस सामने आया। पांडव नगर में पति की हत्या के आरोप में एक महिला और उसके बेटे को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने शव के 10 टुकड़े कर रेफ्रिजरेटर में रखा था और पास के मैदान में फेंक दिया था। सीसीटीवी फुटेज ने सारी सच्चाई खोलकर रख दी। मां और बेटे उस मैदान में कुछ ले जाते देखे गए जहां कूड़ा वाला आता था। यह वारदात भी 6 महीने पहले की है। तब पुलिस को बैग से लाश के हिस्से मिले थे। कटा हुआ ठंडा सिर मिलने से पुलिस को साफ हो गया कि फ्रीजर का इस्तेमाल किया गया है। हाथ के टुकड़े अलग मिले। आसपास के फुटेज खंगालने में समय लगा। अब पता चला है कि अंजन दास से मां और बेटे तंग आ गए थे। अक्सर घर में लड़ाई होती थी। गोली मारकर हत्या की घटनाएं सुनने को मिलती हैं लेकिन यहां तो रिश्तों के टुकड़े-टुकड़े किए गए। न तो उस पत्नी का हाथ कांपा और न बेटे का। अंजन दास को नशे की गोलियां पिलाकर उसका गला काट दिया गया। शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े फ्रीजर में रखे गए जिससे बदबू न आए। आफताब की तरह ये भी एक-एक हिस्से को रोज ठिकाने लगाते थे। वासना की आग! मृतक अंजन दास के रिश्ते भी अजीब थे। जी हां, पांडव नगर हत्याकांड में रिश्तों की कहानी बड़ी उलझी हुई है। वीडियो में दिख रही महिला का नाम पूनम है। 2016 में पूनम के पति कल्लू की मौत हो गई थी। इसके बाद उसने अंजन दास से 2017 में शादी कर ली, वे दोनों 2011 से ही एक साथ रह रहे थे। वीडियो में दिख रहा पुरुष दीपक है और उसके पिता कल्लू थे। उसकी एक बहन भी है। दीपक की शादी हो गई थी और वह अलग रह रहा था। अंजन दास की शादी बिहार के गांव में भी हुई थी और उसके 8 बच्चे हैं। अंजन ने पूनम के जेवरात बेचकर घर में पैसे भेजे थे। पुलिस ने बताया कि कमाई का कोई साधन नहीं था, वह पूनम पर ही आश्रित था। इस कारण अक्सर झगड़े होते रहते थे। पूनम को लग रहा था कि वह उसकी बहू और बेटी पर बुरी नजर रखता है। इसके बाद ही पूनम और दीपक ने मिलकर अंजन की हत्या की साजिश रची। हालांकि अंजन दास से रिश्ते खत्म किए जा सकते थे। अगर वह बुरी नजर रखता था तो पुलिस केस किया जा सकता था लेकिन मां-बेटे ने उसे रास्ते से हटाने के लिए मर्डर करने का ही रास्ता क्यों चुना? वारदात नंबर 2: बेटी की हत्या कर सूटकेस में फेंका श्रद्धा हत्याकांड का खुलासा हो चुका था। एक हफ्ते के भीतर 18 नवंबर को मथुरा में एक लाल सूटकेस में लाश मिली। 22 साल की आयुषी ने अपनी पसंद के लड़के से शादी की थी। लड़का दूसरी जाति का था और इसलिए माता-पिता इसके खिलाफ थे। बताते हैं कि 17 तारीख को आयुषी को माता-पिता समझा रहे थे, वह नहीं मानी तो पिता ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से दो गोलियां दाग दी। वे दुकान से पॉलीथीन खरीद लाए और उसकी लाश को सूटकेस में पैक कर देर रात ठिकाने लगाने चल पड़े। दिल्ली से 150 किमी दूर मथुरा के पास यमुना एक्सप्रेसवे पर उन्होंने लाश को फेंक दिया। पुलिस पूछताछ में माता-पिता दोनों रो रहे थे। उन्हें बाद में पछतावा हो रहा होगा लेकिन अब आयुषी हमेशा के लिए दूर जा चुकी थी। वह बीसीए कर रही थी। इस केस को सुलझाने में पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले। पॉलीथीन में पैक कर हाथ-पैर मोड़कर आयुषी के शव को सूटकेस में ठूंसा गया था। जरा सोचिए 18 साल की उम्र के बाद जब कानून इजाजत देता है तो परिवार अनुमति क्यों नहीं देता है। वैसे भी, अगर बेटा-बेटी बात नहीं सुनते तो उनसे नाते खत्म कर लीजिए, उनकी जान का दुश्मन क्यों बन जाता है परिवार? क्या जान लेना ही एक समाधान बचता है? वारदात नंबर 3: गर्लफ्रेंड के 35 टुकड़े दिल्ली के छतरपुर इलाके में आफताब पूनावाला नाम के शख्स ने अपनी लिव-इन पार्टनर का गला घोंटकर हत्या कर दी और उसके टुकड़े-टुकड़े कर डाले। वह दो साल से ज्यादा समय से श्रद्धा के साथ था लेकिन उसके दिल में प्यार शायद कभी नहीं रहा। श्रद्धा उसके लिए अपने पिता का घर छोड़ आई थी। मां की मौत हो चुकी थी। अब आफताब का असली चेहरा सामने आया। उसने श्रद्धा को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। श्रद्धा को शायद लगा कि वह अपना दर्द किससे कहे क्योंकि घर वह पहले से छोड़ आई थी। कौन क्या कहेगा, इसके चक्कर में उसने घरवालों या दोस्तों को खुलकर अपनी व्यथा नहीं बताई। एक बार पुलिस कंप्लेन की तो आफताब ने इमोशनली ब्लैकमेल किया कि अगर वह उसे छोड़ देगी तो वह आत्महत्या कर लेगा। जबकि नवंबर 2020 में पुलिस को दी गई शिकायत में श्रद्धा ने लिखा था कि आफताब ने उसका गला दबाकर मारने की कोशिश की। उसने धमकाया कि वह उसके टुकड़े-टुकड़े कर देगा। डेढ़ साल बाद आफताब ने उसे मार ही दिया। किसी खौफनाक वेब स्टोरी की कहानी की तरह, आफताब ने बाथरूम में श्रद्धा के शव के टुकड़े किए। गर्म पानी से शव को धोया, हथौड़ी-आरी-कील से हड्डियों को तोड़ा। उसकी दरिंदगी ने खबर पढ़ने वालों को भी डरा दिया कि क्या प्रेम नाम की कोई चीज होती भी है या नहीं। लोगों को बड़े फ्रिज से डर लगने लगा। आफताब ने श्रद्धा के शरीर के हिस्सों को फ्रीज में रखा था और मई के महीने में आधी रात के बाद दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में फेंकने जाता था।


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