'हर घर गंगाजल' से कितनी बदल जाएगी बिहार की तस्वीर? जानिए सीएम नीतीश के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के बारे में सबकुछ

: बिहार के मुख्यमंत्री (Nitish Kumar) का ड्रीम प्रोजेक्ट हर घर गंगाजल योजना की रविवार से शुरूआत हो रही। नालंदा जिले के राजगीर से नीतीश कुमार गंगा जल आपूर्ति परियोजना को लॉन्च कर रहे हैं। इसके साथ ही नालंदा में हर घर गंगाजल पहुंचाने की योजना भी शुरू हो जाएगी। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है मुख्यमंत्री का ये ड्रीम प्रोजेक्ट और क्यों इसकी चर्चा हर जगह हो रही है बताएंगे आगे। 2019 की कैबिनेट बैठक में प्रोजेक्ट को मिली मंजूरीसीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में दिसंबर 2019 में गया में कैबिनेट की विशेष बैठक हुई थी। इसी में इस अतिमहत्वाकांक्षी गंगाजल आपूर्ति परियोजना को मंजूरी दी गई। इसी के अंतर्गत 'हर घर गंगाजल' योजना शुरू की जा रही है। ये योजना गंगा नदी के बचे जल को दक्षिण बिहार के जल संकट वाले शहरों में ले जाकर पेयजल के रूप में इस्तेमाल करने की अनूठी परिकल्पना है। देश में पहली बार गंगा नदी के बाढ़ के पानी को पेयजल के रूप में परिवर्तित कर 7.5 लाख लोगों की प्यास बुझाने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना से 25 लाख से अधिक लोगों को होगा फायदाबिहार सरकार की ओर से 2051 तक जनसंख्या वृद्धि का अनुमान लगाते हुए इस परियोजना का निर्माण किया गया। आने वाले भविष्य में इस परियोजना से लगभग 25 लाख से अधिक लोगों को फायदा होगा। जानकारी के मुताबिक, गंगा जल आपूर्ति परियोजना बिहार ही नहीं देश में अपनी तरह की यह पहली योजना है। इस परियोजना के माध्यम से बाढ़ के मौसम के दौरान गंगा नदी का पानी लेकर जल संकट वाले इलाकों में ले जाया जाएगा और तीन जलाशयों में इसे संग्रहित किया जाएगा। 2020 में इस परियोजना का निर्माण कार्य हुआ शुरूजमा किए पानी को जल संयंत्रों में साफ कर पूरे साल घरों में आपूर्ति की जाएगी। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) ने मई 2020 में इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू किया और निर्धारित समय के भीतर पहले फेज को पूरा किया गया। बिहार के जल संसाधन मंत्रालय में सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने को बताया राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उत्तर बिहार के बड़े इलाके को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है। इसलिए दक्षिण बिहार को किया गया फोकसवहीं दक्षिण बिहार के कई जिलों को हर साल सूखे का सामना करना पड़ता है। दक्षिण बिहार में कई जगहों पर भूजल स्तर भी नीचे चला गया है। धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण नालंदा, गया और बोधगया में हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, मगर इन शहरों में गर्मियों में पेयजल की कमी हो जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य इन्ही दक्षिणी क्षेत्रों नालंदा, गया और नवादा जिलों में उपचारित गंगा जल की आपूर्ति करना है। अलग-अलग फेज में हो रहा कामयही वजह है कि बिहार सरकार ने गंगा जल आपूर्ति योजना परियोजना को अलग-अलग फेज में तरीके से बनाने का निर्णय लिया है, ताकि परियोजना से ना केवल घरों में पानी भेजकर कमी को पूरा किया जाए बल्कि भूजल स्तर को फिर से तैयार करने में भी मदद मिले। हाथीदह पटना जिले के मोकामा शहर में एक जगह है जहां से परियोजना शुरू होती है। यहां गंगा नदी से पानी के स्रोत के लिए एक इंटेक पंप हाउस बनाया गया है। इस पंप हाउस की कुल क्षमता 19.4 क्यूमेक्स है। पहले चरण में यह 5.450 क्यूमेक्स पानी छोड़ेगा। इसमें तीन मोटरें लगाई गई हैं, जिसमें से दो काम कर रही हैं और एक को स्टैंडबाय के रूप में रखा गया है। नालंदा जिले के राजगीर से हो रहा पहले फेज का आगाजहाथीदह से राजगीर में बने डिटेंशन टैंक में 2.4 मिलियन व्यास के पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से पानी भेजा जाएगा, वहां से इसे गंगाजी राजगृह जलाशय, घोरा कटोरा झील और 24 एमएलडी जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) में वितरित किया जाएगा। फिर इस पानी को शुद्ध कर लोगों के घरों में भेजा जाएगा। गंगा नदी से पानी लाने के लिए कुल 151 किलोमीटर लंबाई वाली पाइपलाइन बिछाई गई है। हर घर गंगाजल योजना के पहले चरण की शुरूआत नालंदा जिले के राजगीर से हो रही है। यहां शहर के 19 वार्डों के करीब 8031 घरों में पेयजल के लिए गंगाजल की आपूर्ति की जाएगी। इस योजना के तहत प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर शुद्ध जल की आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। नीतीश कुमार इसके अगले दिन 28 नवंबर को इसी चरण में बिहार के गया और बोधगया में भी इस परियोजना का लोकार्पण करेंगे। वहीं योजना के दूसरे चरण में जून 2023 तक नवादा में भी हर घर गंगाजल पहुंचाने का लक्ष्य है।


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