क्या क्लाउड सीडिंग से साफ होगी दिल्ली की हवा? जानिए कृत्रिम बारिश पर विशेषज्ञों की राय
नई दिल्ली: दिल्ली में होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार कृत्रिम वर्षा पर विचार कर रही है। इस तकनीक के अनुसार, हवा में रसायनिक यौगिकों को छिड़ककर नमी के कणों को एकत्रित किया जाता है, जिससे बादल बनते हैं और बारिश होती है। IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने पिछले साल कृत्रिम वर्षा का सफल प्रयोग किया था। उनके अनुसार अगर मौसम की स्थिति जैसे हवा और नमी अनुकूल हो तो एक दिन के भीतर बड़े क्षेत्र में बादल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने अनुमान लगाया है कि 1 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बादल बनाने में लगभग 1 लाख रुपये का खर्च आएगा। कृत्रिम बारिश के लिए मौसम का प्रतिकूल होना जरूरी IIT कानपुर के प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि कृत्रिम बारिश को 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया जा सकता है। हालांकि, बारिश मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी, जैसे कि हवा में कम से कम 50% नमी होना चाहिए। अगर सभी आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं, तो बादल प्राकृतिक बादलों की तरह काम करेंगे और हवाओं के साथ चलेंगे। बीजिंग ओलंपिक के दौरान चीन ने प्रदूषण से लड़ने के लिए कृत्रिम बारिश का इस्तेमाल किया था। मनीष अग्रवाल ने...