तालिबान की खुशामद को मजबूर हुआ पाकिस्‍तान, हक्कानी से मिलने दौड़े-दौड़े काबुल पहुंचे मुनीर के करीबी नकवी, मांगी मदद

काबुल: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से कई मुद्दों पर सहयोग मांगा है। खासतौर से उन गुटों पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान ने तालिबान से मदद मांगी है, जो अफगान सीमा के पास सक्रिय हैं। इसके लिए रविवार को असीम मुनीर के करीबी मोहसिन नकवी काबुल पहुंचे हैं। काबुल में नकवी ने अफगानी गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के साथ बैठक की है। की ओर से हालिया हफ्तों तक अफगानिस्तान को सैन्य कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा था। हालांकि अब पाक सरकार और सेना नरम पड़ी है और अफगानिस्तान से बात करने पर आगे बढ़ रही है।पाक मीडिया के मुताबिक, मोहसिन नकवी ने रविवार को की एक दिवसीय यात्रा के दौरान अफगानिस्तान की अतालिबान सरकार को अशांति और अस्थिरता पैदा करने वाले आतंकवादी समूहों से मिलकर लड़ने का प्रस्ताव दिया। नकवी ने अफगानिस्तान के साथ संबंधों को फिर से स्थापित करने और आतंकवाद के मुद्दे को सुलझाने के लिए प्रयास पर जोर दिया है।

टीटीपी की सक्रियता पर बातचीत

मोहसिन नकवी ने सिराजुद्दीन हक्कानी के साथ बातचीत में अफगनिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और दूसरे पाकिस्तान विरोधी समूहों की मौजूदगी का मुद्दा सबसे ऊपर रहा। नकवी ने कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी अफगानिस्तान को भाई मानता है लेकिन आतंकवादी समूहों की गतिविधियां द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़ी बाधा है।हक्कानी के साथ बैठक के बाद नकवी के ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अफगान-पाक सीमा पर सक्रिय सश्स्त्र संगठन अशांति और अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। ऐसे में दोनों मंत्रियों ने इस मुद्दे पर चर्चा की। इसके अलावा सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम और सीमा पार आवाजाही को नियंत्रित करने पर भी बातचीत हुई।

क्यों है पाकिस्तान-अफगानिस्तान में तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है। इसकी एक बड़ी वजह टीटीपी गुट है। टीटीपी ने लगातार खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पाक आर्मी पर हमले किए हैं। पाकिस्तान का कहना है कि टीटीपी को अफगानिस्तान में पनाह मिल रही है। इस मुद्दे पर दोनों देशों में कई मौकों पर भारी तनाव देखा गया है।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम करने की शुरुआत इस साल मई में हुई, जब चीन ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बीजिंग में मुलाकात कराई। इसके बाद से पाकिस्तान के मंत्रियों और उच्च अधिकारियों ने लगातार अफगानिस्तान के दौरे किए हैं। पाकिस्तानी नेताओं के अफगानिस्तान के दौरे करने की एक वजह तालिबान का भारत के लिए झुकाव भी रहा है।


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