कब्रिस्तान में नहीं दफनाने दिया पत्नी का शव! फिर हिंदू रीति रिवाज से किया अंतिम संस्‍कार

गौरव राठौर, औरैया: के औरैया जिले से दिल को छू लेने वाला एक मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम को जानने के बाद आप प्रेम और संबंधों को अगल नजर से देखने के लिए मजबूर हो जाएंगे। दिबियापुर के असेनी गांव में मुस्लिम व्यक्ति ने मानसिक रूप से कमजोर निराश्रित एक हिंदू महिला को करीब 30 साल से पत्नी की तरह रख लिया था। हालांकि उससे निकाह नहीं किया। शुक्रवार को बीमारी से महिला का मौत हो गई। इस पर उसने हिंदू लोगों से चर्चा की फिर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया। वाकर अली मूल रूप से में रसूलाबाद के उसरी विला गांव के निवासी हैं। वह 30 साल पहले असेनी गांव में आ गए थे। घर न होने के कारण वह एक पुरानी साधन सहकारी समिति की खंडहर इमारत में रह रहे थे। वाकर ने बताया कि मानसिक बीमार निराश्रित महिला भगवती की सेवा की फिर उससे पत्नी की तरह रखा। इस बीच महिला बीमारी की वजह से कमजोर हो गई। शनिवार को 53 वर्षीय भगवती ने दम तोड़ दिया।‌ धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार होने से उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है, ऐसा बताए जाने पर उसने हिंदू समुदाय से बात की और उनके सहयोग से दिबियापुर के मुक्तिधाम में मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। वाकर अली ने मुखाग्नि दी तो इसकी चर्चा जिले में होने लगी।

पहले ले गया था कब्रिस्तान

वाकर अली ने बताया कि पहले उसके मन में ऐसी बात नहीं आई तो वह कथित पत्नी भागवती के शव को लेकर कब्रिस्तान पहुंच गया था। वहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कहा कि बिना निकाह और धर्म परिवर्तन कराए महिला को रखा गया था। ऐसे में उसका धर्म हिंदू हैं और उसका अंतिम संस्कार कब्रिस्तान के बजाए हिंदू रीति-रिवाज से ही करने की सलाह दी। तब वह शव लेकर मुक्तिधाम घाट पहुंचा‌।

इंसानियत का काम किया

दिबियापुर के मुतवल्ली मसीद कादरी ने बताया कि वाकर अहमद ने अगर किसी हिंदू समाज की महिला को रखा और उसकी मौत हो गई तो सबके सहयोग से मुक्तिधाम में उसका हुआ तो यह इंसानियत की बात है। वहीं महिला अगर समाज की होती तो उसका दाह संस्कार नहीं कर सकते थे।


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