नया वेरिएंट या कुछ और... कोरोना के मामले एक बार फिर क्यों बढ़ रहे? जानें सभी सवालों के जवाब

नई दिल्ली: भारत में एक बार फिर से कोविड-19 अपने पैर पसार रहा है। देशभर में कोरोना वायरस के एक हजार से ज्यादा केस हो चुके हैं। भारत के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में भी यह दोबारा उभर रहा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे लेकर पैनिक करने की जरुरत नहीं है। फिलहाल कोविड के लक्षण हल्के हैं, लेकिन कुछ बुनियादी सावधानियां जरूरी हैं। कोविड को लेकर आम लोगों के मन में आ रहे जरूरी सवालों के जवाब हम आपको बता रहे हैं।

कोविड-19 के मामले फिर क्यों बढ़ रहे हैं?

हम अब उस दौर में हैं जहां SARS-CoV-2 (कोविड-19 का वायरस) अन्य श्वसन वायरसों की तरह व्यवहार कर रहा है। इसमें मौसमी उतार-चढ़ाव, क्षेत्रीय बदलाव और दोबारा संक्रमण की लहरें देखने को मिल रही हैं। मामले बढ़ने का मुख्य कारण है कि पहले हुए संक्रमण या वैक्सीन से मिली सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (हर्ड इम्यूनिटी) कम हो रही है। कई लोग, जिन्हें शुरुआती लहरों में वैक्सीन लगी थी, ने एक साल या उससे ज्यादा समय से बूस्टर डोज नहीं लिया। वैक्सीन या प्राकृतिक संक्रमण से मिली रोग प्रतिरोधक क्षमता समय के साथ कमजोर पड़ती है, जिससे दोबारा हल्का संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा, महामारी के दौरान या बाद में पैदा हुए छोटे बच्चों का एक समूह है, जो न तो वायरस के संपर्क में आया है और न ही वैक्सीन ले चुका है। यह समूह आसानी से वायरस की चपेट में आ सकता है और इसे फैला सकता है।

क्या नए वेरिएंट इसके लिए जिम्मेदार हैं?

अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं है कि कोई खास वेरिएंट इस बढ़ोतरी का कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय एजेंसियां JN.1, LF.7 और NB.1.8.1 जैसे कुछ नए वेरिएंट्स पर नजर रख रही हैं, लेकिन ऐसा कोई संकेत नहीं है कि ये पहले के ओमिक्रॉन वेरिएंट्स से ज्यादा संक्रामक या गंभीर हैं। भारत में पर्याप्त जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं हो रही है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ये वेरिएंट्स ही मौजूदा बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार हैं।

हाल के मामले कितने गंभीर हैं?

वैश्विक और भारतीय आंकड़ों से पता चलता है कि LF.7 और NB.1.8.1 जैसे वेरिएंट्स पहले के ओमिक्रॉन वेरिएंट्स की तुलना में ज्यादा संक्रामक या रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने वाले नहीं हैं। ज्यादातर मरीजों में हल्के, फ्लू जैसे लक्षण दिख रहे हैं। ये वेरिएंट्स ज्यादा संक्रामक लेकिन कम घातक हैं, जो वायरस के सामान्य स्थिति (एंडेमिक) की ओर बढ़ने का संकेत है। अस्पताल में भर्ती होने या गंभीर मामलों में बढ़ोतरी नहीं देखी गई है, जो तब होता अगर कोई खतरनाक नया वेरिएंट फैल रहा होता। गंभीर मामले ज्यादातर बुजुर्गों या गंभीर बीमारियों (जैसे मधुमेह, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग) वाले लोगों तक सीमित हैं।

इसके लक्षण क्या हैं?

WHO और भारतीय अधिकारियों के अनुसार, ये वेरिएंट्स ज्यादातर मामलों में हल्की, अपने आप ठीक होने वाली बीमारी पैदा कर रहे हैं। लक्षण सामान्य फ्लू या अन्य श्वसन संक्रमणों जैसे RSV से मिलते-जुलते हैं। आम लक्षण हैं:
  • हल्का बुखार
  • सूखी खांसी
  • गले में खराश
  • नाक बहना या बंद होना
  • थकान
  • शरीर और जोड़ों में दर्द
  • कुछ मामलों में सिरदर्द या हल्की पेट की गड़बड़ी

क्या बदल गया है?

  • पहले के वेरिएंट्स में स्वाद या गंध का चले जाना आम था, लेकिन अब यह लक्षण ज्यादातर मामलों में नहीं दिखता।
  • सांस लेने में तकलीफ, ऑक्सीजन की कमी, या निमोनिया जैसे गंभीर लक्षण अब बहुत कम देखे जा रहे हैं, खासकर वैक्सीन ले चुके या पहले संक्रमित हो चुके लोगों में।
  • ज्यादातर मरीज 3-5 दिनों में घर पर ही ठीक हो रहे हैं। पर्याप्त पानी, पैरासिटामॉल, और आराम से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • एंटीवायरल दवाएं केवल उच्च जोखिम वाले या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए जरूरी हैं।

कौन जोखिम में है?

कुछ समूहों को अभी भी कोविड-19 से सावधान रहने की जरूरत है, भले ही यह हल्का हो:
  • बुजुर्ग (60 साल से ज्यादा उम्र वाले)
  • गंभीर बीमारियों वाले लोग, जैसे मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, कैंसर, या किडनी की समस्याएं
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, जैसे कि इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेने वाले
  • इन समूहों को लक्षण दिखने पर जल्दी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए और सावधानी बरतनी चाहिए।

हमें कैसे पता चलेगा कि यह कोविड है?

अब कोविड-19 के लक्षण अन्य सामान्य वायरल संक्रमणों, खासकर मानसून में होने वाले फ्लू या वायरल ब्रॉन्काइटिस से लगभग एक जैसे हैं। स्वाद या गंध का नुकसान, तेज बुखार, और सांस लेने में तकलीफ, जो पहले कोविड को पहचानने में मदद करते थे, अब दुर्लभ हैं। केवल लक्षणों के आधार पर कोविड की पहचान लगभग असंभव है। इसलिए, अब रणनीति यह होनी चाहिए कि कोविड और अन्य श्वसन संक्रमणों को अलग करने की कोशिश करने के बजाय, ऐसी आदतें अपनाएं जो सभी श्वसन रोगों के प्रसार को रोकें।

क्या करें?

  • अगर आपको फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो टेस्ट करवाएं।
  • संदेह होने पर आइसोलेट करें, मास्क पहनें, और ऐसी सावधानियां बरतें जैसे कि यह कोविड हो।

क्या हमें फिर से वैक्सीन लेने की जरूरत है?

मौजूदा वैक्सीन, भले ही नए वेरिएंट्स के लिए खास तौर पर अपडेट न हों, गंभीर बीमारी से सुरक्षा देती हैं। लेकिन चूंकि ज्यादातर मामले हल्के हैं और स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा बोझ नहीं है, अभी बूस्टर डोज की तत्काल सिफारिश नहीं है।वैश्विक स्तर पर रणनीति अब सामूहिक वैक्सीनेशन से जोखिम-आधारित सुरक्षा की ओर बढ़ रही है। यानी भविष्य में वैक्सीन की सिफारिश होने पर प्राथमिकता इन समूहों को दी जाएगी:
  • 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग
  • गंभीर बीमारियों वाले लोग (मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, किडनी रोग)
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज
  • स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन कर्मचारी
मौजूदा वैक्सीन पुराने वेरिएंट्स (वुहान, डेल्टा, या शुरुआती ओमिक्रॉन) के लिए बनाई गई थीं। ये गंभीर बीमारी और मृत्यु से कुछ हद तक सुरक्षा देती हैं, लेकिन नए वेरिएंट्स से हल्के या बिना लक्षण वाले संक्रमण को रोकने में उनकी प्रभावशीलता कम है। इसलिए, वही वैक्सीन दोबारा लेने से ज्यादा फायदा नहीं हो सकता।

आगे क्या करें?

  • सावधानी बरतें: मास्क पहनें, खासकर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर।
  • हाथ धोते रहें: नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना वायरस से बचाव का आसान तरीका है।
  • लक्षणों पर नजर रखें: अगर आपको बुखार, खांसी, या थकान जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत टेस्ट करवाएं और आइसोलेट करें।
  • उच्च जोखिम वाले लोग सतर्क रहें: बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों वाले लोगों को खास ध्यान रखना चाहिए।
  • स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करें: अगर लक्षण गंभीर हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


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