पुणे पोर्श केस: ब्लड सैंपल बदलने की आरोपी नाबालिग की मां को 10 महीने बाद मिली जमानत
पुणे: सुप्रीम कोर्ट ने में आरोपी नाबालिग की मां को जमानत दे दी। उन्हें 10 महीने से ज्यादा जेल में बिताने के बाद यह राहत मिली है। जस्टिस बी आर गवई और ए जी मसीह की बेंच ने मंगलवार को गिरफ्तारी के कारणों को बताने के कानूनी सवाल पर कई याचिकाएं सुनीं। इन याचिकाओं में पोर्श हादसे के मुख्य आरोपी की मां की याचिका भी शामिल थी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की मां 10 महीने से ज्यादा समय से जेल में हैं इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि उन पर सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देने के कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.खुलासे के बाद हुई थी अरेस्ट 19 मई 2024 को में पोर्श चला रहे नाबालिग वेदांत अग्रवाल ने बाइक सवार को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में दो इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई थी। वेदांत का ब्लड सैंपल पुणे से ससून हॉस्पिटल में जांच के लिए भेजा गया था। बाद में पता चला कि ससून अस्पताल के दो डॉक्टरों ने पैसे के लालच में नाबालिग का ब्लड सैंपल उसकी मां के खून से बदल दिया गया। इस कारण ब्लड में शराब पीने की पुष्टि नहीं हो सकी थी। इस खुलासे के बाद वेदांत की मां को भी गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने जमानत के लिए मुंबई हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे नामंजूर कर दिया गया। फिर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। 10 महीने बाद मिली बेल एडवोकेट विक्रम चौधरी और निखिल जैन ने में बिना कारण बताए गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि इसी केस में ब्लड सैंपल बदलने के दो अन्य आरोपियों को पुणे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से जमानत मिल गई है, जबकि वह पिछले 10 महीने से जेल में हैं। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें जमानत देने का आदेश दिया। बता दें कि में स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल बदलने वाले ससून अस्पताल के दो डॉक्टरों डॉ. अजय तावरे और डॉ. श्रीहरि हलनोर का लाइसेंस रद्द कर दिया है।
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