आखिर भारत में क्‍यों नहीं हो सकते लेबनान जैसे मोबाइल ब्‍लास्‍ट? समझाया कानपुर IIT के एक्‍सपर्ट ने

प्रवीन मोहता, कानपुर: लेबनान में पेजर और वॉकी टॉकी में धमाकों की घटनाओं ने भारत में स्मार्टफोन यूजर्स को कुछ चिंता में डाल दिया है, लेकिन आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मणींद्र अग्रवाल ने कहा है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल सेफ है। लेकिन भविष्य में इसकी सप्लाई चेन पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा संभव है कि डर फैलाने के मकसद से कुछ लोग कुछ हरकत कर दें। किसी स्मार्टफोन में रिसीवर और विस्फोटक लगाकर रेडियो वेव्स को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर इसमें विस्फोट कराया जा सकता है।कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग के प्रोफेसर अग्रवाल ने स्मार्टफोन की सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन की सुरक्षा को विस्तार से समझना होगा। आपके ऊपर फोन के जरिए अटैक तब हो सकता है, जब आपकी लोकेशन किसी को पता चले। एंड्रॉयड या आईओएस जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम को हमारी हर लोकेशन पता होती है। हमारी पूरी जानकारियां भी इनके पास होती है।

ओएस हैक करना संभव नहीं

कोई अराजकतत्व आपके फोन को तब हथियार बना पाएगा, जब वो गूगल या एपल के ऑपरेटिंग सिस्टम को हैक कर उसे सभी जगह सर्कुलेट करें दें। ये ग्लोबल कंपनियों के सिस्टम में सेंध लगाने जैसा होगा, जो फिलहाल संभव नहीं दिखता। इन कंपनियों की विश्वसनीयता और नाम बहुत बड़ा है। लेबनान में पेजर ब्लास्ट के बाद कंपनियां अब अपने फोन सॉफ्टवेयर के लूपहोल तलाश रही होंगी। बैटरी हीट करना भी ऑपरेटिंग सिस्टम की वजह से संभव नहीं है।

'बस डर फैला सकते हैं'

प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि भारत में स्मार्टफोन से लेबनान जैसा हमला संभव नहीं है। फैक्ट्री से निकलने के बाद किसी को नहीं पता होता कि कौन सा फोन किस यूजर के हाथ जाएगा। किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करना तो असंभव है। लेकिन ये आशंका नकारी नहीं जा सकती कि लोगों में डर फैलाने के लिए खुराफात कर दी जाए। मसलन, इसके लिए रैंडम बेसिस पर कुछ फोन इंटरसेप्ट कर इसमें विस्फोटक फिट किए जा सकते हैं। इससे लोगों के दिमाग में डर फैल सकता है। लेकिन ये आशंका भी के मुकाबले काफी कम है। ऐसा हो भी गया, तो फोन कंपनी की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। तमाम तर्कों के बावजूद ये संभव है कि दूसरे देशों से बनकर आ रहे फोन का कंट्रोल किसी एक देश के पास चला जाए और फोन हथियार बन जाएं।

लॉजिस्टिक्स पर ध्यान देने की जरूरत

पेजर ब्लास्ट ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को सुरक्षित बनाने में एक नया एंगल जोड़ा है। फैक्ट्री से निकलकर डीलर और यूजर तक फोन पहुंचाने वाली लॉजिस्टिक्स चेन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हो सकता है कि किसी एक क्षेत्र या राज्य को जाने वाले फोन को इंटरसेप्ट कर कुछ गड़बड़ी कर दी जाए। लेकिन सभी स्मार्टफोन लगभग सेफ हैं।

हथियार बन सकती रेडियो तरंगें

प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि मोबाइल फोन का आधार रेडियो वेव्स हैं। कुछ स्मार्टफोनों की लॉट को रोककर उसमें रेडियो रिसीवर, थोड़ा विस्फोटक और ट्रिगर लगाने के बाद इसे सर्किट से जोड़कर रेडियो वेव्स के जरिए दूर से धमाका किया जा सकता है। फोनों में पीछे 3-4 ग्राम पाउडर लगाना बड़ी बात नहीं है।


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