रूस ने ईरान को दिया परमाणु सीक्रेट? टेंशन में आए अमेरिका-ब्रिटेन, न्यूक्लियर हथियार बनाने के करीब पहुंचा मुस्लिम देश

वॉशिंगटन: यूक्रेन युद्ध के कारण अब अमेरिका और ब्रिटेन के सामने एक नई तरह की मुसीबत आ गई है। ब्रिटेन और अमेरिका ने आशंका जताई है कि ईरान की ओर से रूस को बैलिस्टिक मिसाइलें दी गई हैं और इसके बदले में रूस ने न्यूक्लियर सीक्रेट साझा किया है। वॉशिंगटन डीसी में अपने शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने स्वीकार किया कि दोनों देश ऐसे समय में सैन्य सहयोग बढ़ा रहे हैं, जब ईरान लंबे समय से परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम एनरिचमेंट की प्रक्रिया में है। गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश सूत्रों ने संकेत दिया कि परमाणु टेक्नोलॉजी के लिए ईरान के रूस से संबंधों पर चिंता व्यक्त की गई।पिछले सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ब्रिटेन की यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने इसी तरह की चेतावनी दी थी। हालांकि इसपर तब बहुत कम ध्यान दिया गया था। ब्लिंकन ने कहा था, 'रूस वह टेक्नोलॉजी शेयर कर रहा है जो ईरान चाहता है। यह दो-तरफा रास्ता है, जिसमें परमाणु के साथ-साथ स्पेस से जुड़ी टेक्नोलॉजी दी जा रही है।' ब्लिंकन ने दोनों देशों पर अस्थिर करने वाली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जो दुनिया भर के लिए खतरा पैदा करती है।

चार परमाणु बम का यूरेनियम

ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने पिछले सप्ताह संयुक्त रूप से चेतावनी दी थी कि ईरान का एनरिच यूरेनियम भंडार लगातार बढ़ता जा रहा है। उसके पास चार परमाणु बम बनाने के बराबर का यूरेनियम है। लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि ईरान के पास हथियार बनाने की कितनी जानकारी है या वह कितनी जल्दी ऐसा कर सकता है। लेकिन रूस के वैज्ञानिकों का मिलकर हथियार बनाना या रूस की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ईरान को जल्द से जल्द बम बनाने में मदद दे सकता है। ईरान हालांकि इस बात से इनकार करता है कि वह परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है।

रूस को हथियार सप्लाई कर रहा ईरान

ईरान ने 2015 में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ प्रतिबंधों से राहत के बदले में परमाणु हथियार न बनाने की डील की थी। 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को तोड़ दिया। पिछले कई महीनों से ऐसी खबरें आती रही हैं कि पश्चिमी देशों को चिंता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन की ओर से यूक्रेन पर हमला करने के तुरंत बाद ईरान ने रूस को ड्रोन की आपूर्ति शुरू कर दी। ईरान आज के समय रूस के हथियारों का कारखाना बन गया है। रूस और ईरान ऐतिहासिक रूप से सहयोगी नहीं है। लेकिन पश्चिम विरोधी होने के कारण साथ आ गए हैं।


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