मध्य प्रदेश: गांव के हर घर में एक-एक शिक्षक, टीचर्स डे पर जानें 'शिक्षकों के गांव' की कहानी

नरसिंहपुर: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले का सिंहपुर गांव, शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण का जीता-जागता उदाहरण है। यहां पीढ़ी दर पीढ़ी शिक्षक बनने की परंपरा रही है, जिसके कारण इसे शिक्षकों का गांव भी कहा जाता है। गांव की लगभग 5500 की आबादी में 400-500 शिक्षक हैं। यह पूरी आबादी का लगभग 10 फीसदी है। गांव में यह परंपरा सालों से चल रही है।

शिक्षकों की वजह से गांव में बदलाव

वहीं, सिंहपुर में शिक्षा को समाज की उन्नति का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। यहां के निवासी शिक्षा के प्रति गहरी आस्था रखते हैं और इसी का परिणाम है कि पीढ़ियों से यह सिलसिला अनवरत जारी है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर आप यहां एक पत्थर भी उछालें, तो वह किसी शिक्षक पर ही गिरेगा।

एक ही परिवार में 10 शिक्षक

मीडिया से बात करते हुए गांव के निवासी राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि हमारे ही परिवार में ही 10 शिक्षक हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता ने ऐसे संस्कार दिए कि शिक्षा को ही सबसे बड़ा धर्म माना। वहीं, एक अन्य निवासी आशीर्वाद शर्मा, जिनके माता-पिता भी उसी स्कूल में शिक्षक थे, जहां उन्होंने पढ़ाई की है। गांव के लोग बताते हैं कि यहां बहुत से ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार मिला है।गौरतलब है कि यह गांव इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा का प्रकाश फैलाने में शिक्षकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर, सिंहपुर गांव हमें याद दिलाता है कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज और देश का विकास संभव है। गांव में शिक्षकों की अधिकता अधिक होने की वजह से आज कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है।


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