रेप पीड़िता से शादी, कर्नाटक हाई कोर्ट ने आरोपी को दी 16 दिन की जमानत, जानें, पूरा मामला

बेंगलुरु : कर्नाटक में एक दिलचस्प मामला सामने आया है। यहां हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम 2012 के तहत गिरफ्तार किए गए एक 23 वर्षीय युवक को जमानत दी है। यह 16 दिन की जमानत आरोपी को शादी के लिए दी गई है। आरोपी उसी पीड़िता से विवाह कर रहा है, जिसके साथ रेप के आरोप में वह जेल में है। पीड़िता रेप के समय नाबालिग थी लेकिन अब 18 वर्ष की हो गई है और अब उनका विवाह हो रहा है। इसे एक रेयर मामला मानते हुए न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने याचिकाकर्ता-आरोपी को 17 जून से 3 जुलाई तक मैसूर शहर की जेल से रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने ऐसा फैसला इसलिए लिया है ताकि दंपत्ति विवाह कर सकें और उनके अब एक वर्षीय बच्चे को किसी भी प्रकार की बदनामी न झेलनी पड़े।न्यायाधीश ने कहा, 'विवाह के साक्ष्य का प्रमाण पत्र अगली सुनवाई की तारीख (4 जुलाई) को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता को अधिकार क्षेत्र वाले पुलिस थाने में सप्ताह में एक बार अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।'

16 साल की उम्र में हुई गर्भवती

लड़की की उम्र 16 साल 9 महीने थी जब उसकी मां ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते थे और घर से भाग गए थे। इस दौरान उन्होंने मंदिर में शादी की और साथ रहने लगे। लड़की गर्भवती हो गई। पुलिस ने उसे बरामद किया। लड़के को जेल भेज दिया गया जबकि लड़की को उसके घर भेज दिया गया। कुछ दिनों बाद लड़की ने एक बच्ची को जन्म दे दिया।

2023 से न्यायिक हिरासत में आरोपी

लड़के ने मैसूरु की एक विशेष अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का अवलोकन करने के बाद, न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने पाया कि याचिकाकर्ता आरोपी शिकायत दर्ज होने के अगले दिन 16 फरवरी 2023 से ही न्यायिक हिरासत में है।

घर से भागे थे दोनों

न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादियों के वकील ने कहा है कि याचिकाकर्ता और लड़की एक-दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन उनके माता-पिता ने इसका विरोध किया। दंपति से पैदा हुआ बच्चा अब एक साल का हो गया है। न्यायाधीश ने कहा, 'पक्ष याचिकाकर्ता की लड़की से शादी करने की इच्छा के कारण कार्यवाही को बंद करने की मांग कर रहे हैं ताकि उसे और उसके बच्चे को मुश्किल में न छोड़ा जाए। अब, परिवार भी दोनों की शादी करवाना चाहते हैं।'

बच्ची के हित में कोर्ट ने दिया फैसला

यह देखते हुए कि लड़की अब 18 वर्ष की हो चुकी है, न्यायाधीश ने कहा कि डीएनए परीक्षण से पुष्टि हो गई है कि यह दम्पति ही बच्ची के जैविक माता-पिता हैं। न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत दे दी, जिससे याचिकाकर्ता बाहर आकर पीड़िता से विवाह कर सके।न्यायाधीश ने कहा, 'मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में मौजूद विशिष्टताओं के कारण यह कदम उठाया गया है, क्योंकि मां को बच्चे का पालन-पोषण करना है। नवजात को भविष्य में किसी भी तरह की बदनामी नहीं झेलनी चाहिए। इसलिए, बच्चे के हितों की रक्षा करने और बच्चे के पालन-पोषण में मां की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी करना आवश्यक पाया गया है।'


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