राजस्थान: झोटवाड़ा में राज्यवर्धन की मुश्किलें बढ़ी, शेखावत की नाराजगी के बीच एक और राजपूत नेता ने ठोकी ताल

जयपुर: में बीजेपी की ओर से 41 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करने की कई सीटों पर प्रत्याशियों का विरोध होने लगा है। जयपुर की झोटवाड़ा सीट से पूर्व मंत्री को टिकट नहीं मिलने से समर्थक काफी नाराज हैं। बीजेपी ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को टिकट दिया है। राठौड़ को टिकट दिए जाने के बाद राठौड़ और शेखावत के समर्थक आमने सामने हैं। उधर, एक और राजपूत नेता आशु सिंह सुरपुरा भी टिकट पाने के प्रयास में लगे हुए हैं। पार्टी की ओर से टिकट बदलने की संभावना नहीं है लेकिन नेताओं के न सिर्फ प्रयास जारी हैं बल्कि विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

काली पट्‌टी बांध निकाला मौन जुलूस

झोटवाड़ा से पूर्व विधायक और मंत्री रापाल सिंह शेखावत के समर्थकों ने गुरुवार को जयपुर में विरोध प्रदर्शन किया। को टिकट दिए जाने के खिलाफ काली पट्‌टी बांधकर मौन जुलूस निकाला गया। कालवाड़ रोड पर राजपाल सिंह के करीब 300-400 समर्थक एकजुट हुए और मार्बल मंडी से हाथोज चौराहे तक जुलूस निकाल। इस जुलूस के बाद बड़े स्तर पर विरोध का निर्णय भी लिया गया।

वसुंधरा के बंगले पर जमावड़ा और 'राज्यवर्धन सिंह गो बैक' के नारे

राजपाल सिंह के समर्थकों के इस जुलूस वाले प्रदर्शन के पहले भी राज्यवर्धन सिंह को टिकट दिए जाने का विरोध हो चुका है। 9 अक्टूबर को बीजेपी की पहली सूची जारी होने बाद उसी रात राजपाल सिंह पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आवास पर पहुंचे थे। उनके समर्थक भी वहां जमा हुए और जमकर नारेबाजी हुई। वहां देर रात तक 'राज्यवर्धन सिंह गो बैक' के नारे लगते रहे।

शेखावाटी के आशु सिंह भी लगा रहे दमखम

झोटावाड़ा विधानसभा सीट पर राज्यवर्धन सिंह को टिकट दिए जोन के बाद भी राजपाल सिंह के समर्थकों का विरोध जारी है। यही नहीं एक और राजपूत नेता आशु सिंह सुरपुरा भी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। लॉ की पढ़ाई पूरी कर समाज सेवा के रास्ते राजनीति में कदम बढ़ा रहे आशू सिंह शेखावत (सुरपुरा) भी इस क्षेत्र से ताल ठोक रहे हैं। राजपाल सिंह और आशु सिंह दोनों ही बीजेपी से टिकट मांग रहे हैं लेकिन यदि टिकट में बदलाव नहीं किया गया तो यही दोनों पार्टी के लिए नुकसान का कारण भ्ज्ञी बन सकते हैं।

डैमेज कंट्रोल में जुटे अरुण सिंह जुटे

पहली लिस्ट जारी होने के बाद बीजेपी में मुखर हुए विरोध और डैमेज को कंट्रोल करने में वरिष्ठ नेता जुटे हैं। प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह लगातार विरोध में उतरे नेताओं के सम्पर्क में हैं। उधर, पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की इन मामलों में चुप्पी पर भी सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब देखना है कि बीजेपी के उम्मीदवारों की अगली सूची में इस विरोध के चलते कोई नया नाम सामने आता है या टिकट में बदलाव होता है।


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