किंग मेकर मां, जिसकी एक चाल ने बेटे प्रज्ञानंदा को बना दिया शतरंज का 'चाणक्य'

दुनिया की सबसे बड़ी योद्धा मां होती है... चेस बोर्ड पर चालें चलते प्रज्ञानंदा के बगल में बैठी महिला उनकी मां हैं और उन्हें देखने के बाद सुपरस्टार यश की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'KGF' का डायलॉग आपको याद आ गया होगा। फिल्म के एक सीन में हीरो लग्जरी कार में नकचढ़ी गर्लफ्रेंड के साथ है। उसी वक्त दिखता है नवजात बेटे को गोद में दुबकाए एक ब्रेड के लिए मां संघर्ष कर रही है। भीड़ के बीच पसीने से लथपथ महिला को देखने के बाद हीरो को अपनी मां का ख्याल आता है और वह कुछ ऐसा करता है, जिससे सबकुछ थम जाता है। हाथ में तमंचा लिए कार से बाहर निकलता है और ब्रेड उठाकर महिला को देते हुए कहता है- दुनिया की सबसे बड़ी योद्धा मां होती है...।ये मां ही तो है, जिसने दुबले पतले से दिखने वाले बेटे प्रज्ञानंदा को खेलने-कूदने की उम्र में शतरंज की दुनिया का बादशाह बना दिया। बेटा भी क्या खूब निकला... मां के सपनों को पूरा करने के लिए 64 मुहरों वाले इस खेल को ऐसा सीखा कि चाणक्य बन गया। अब वह 5 बार के चैंपियन कार्लसन से लोहा ले रहे हैं और भारत का हर नागरिक चाहेगा कि वह विश्व विजेता बने। पूरा देश 18 वर्ष के लड़के के लिए दुआ कर रहा है तो इस पूरे अभियान में एक ऐसा शख्स भी है, जो कंधे से कंधा मिलाकर शतरंज की हर चाल पर साथ चलता रहा है।जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रज्ञानंदा की मां नागलक्ष्मी के बारे में। वह हर मैच में बेटे के साथ होती हैं। दुबली पतली सी दिखने वाली नागलक्ष्मी वह किंग मेकर हैं, जिसने भारत को शतरंज की दुनिया का सबसे बड़ा चाणक्य प्रज्ञानंदा दिया। बड़ी बहन वैशाली को खेलते देखकर शतरंज सीखने वाले प्रज्ञानंदा की जिंदगी बहुत सिंपल है। विपक्षी, जिसे हराना है और कोने में बैठी मां, हर जीत-हार में साथ होती है।यही वजह है कि भारत के युवा ग्रैंडमास्टर के विश्व कप में शानदार प्रदर्शन ने दिग्गज खिलाड़ी गैरी कास्परोव को अपने दिनों की याद दिला दी जब वह 64 खानों के इस खेल के बादशाह हुआ करते थे। पूर्व विश्व चैंपियन कास्परोव ने इस 18 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी और उनकी मां के प्रयासों की जमकर तारीफ की। कास्परोव ने ट्वीट किया, ‘प्रज्ञानंदा और उनकी मां को बधाई। मैं उन खिलाड़ियों में शामिल था जिनकी मां प्रत्येक प्रतियोगिता में उनके साथ में होती थी। यह विशेष प्रकार का समर्थन होता है। चेन्नई के रहने वाले भारतीय खिलाड़ी ने न्यूयॉर्क के दो खिलाड़ियों को हराया। वह विषम परिस्थितियों में भी दृढ़ बना रहा।’प्रज्ञानंदा ने सेमीफाइनल में टाईब्रेक में कारुआना को 3.5-2.5 से हराया। दो मैचों की क्लासिकल सीरीज 1-1 से बराबरी पर समाप्त होने के बाद प्रज्ञानंदा ने बेहद रोमांचक टाईब्रेकर में अमेरिका के दिग्गज ग्रैंड मास्टर को पराजित किया। विश्वनाथन आनंद के बाद प्रज्ञानंदा दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने शतरंज विश्वकप के फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने पहली बाजी कार्लसन के साथ ड्रॉ खेली और अब आज तय होगा कि कौन विजेता बनता है।


from https://ift.tt/TtWw9bU

Comments

Popular posts from this blog

आध क गलत सचन और करयकरम म एक घट क दर स पहच सएम गहलत फर हआ एकशन