कंगाल पाकिस्तान में व्यापारियों का बुरा हाल, लेकिन 'दिन दोगुना-रात चौगुना' बढ़ रहा इकलौता यह बिजनेस
इस्लामाबाद: आर्थिक संकट के चलते अब पाकिस्तानी रुपया गिरता जा रहा है। पाकिस्तान में इस समय लगभग हर तरह के व्यापार ठप होने की कगार पर हैं। लेकिन एक ऐसा धंधा है जो इस आर्थिक संकट में चल निकला है। हम बात कर रहे हैं, डॉलर के कालाबाजारी की। बैंकों में करेंसी एक्चेंज और खुले बाजारों के मूल्य का अंतर बढ़ता जा रहा है। इसके साथ अब डॉलर की कालाबाजारी हो रही है और खुले मार्केट में काफी महंगे दाम पर बिक रहा है। इंटरबैंक बाजार में शुक्रवार को रुपया 3 फरवरी को 276.58 से बढ़ कर 258.99 पर पहुंच गया। लेकिन खुले बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 268 पर बंद हुआ।पाकिस्तान में डॉलर की डिमांड लगातार बढ़ रही है। अवाम अब पाकिस्तानी रुपए की जगह जेब में डॉलर रखना चाहती है। इसी कारण लगातार उसकी कालाबाजारी बढ़ रही है। पाकिस्तान की ब्लैक मार्केट में 1 डॉलर 300 पाकिस्तानी रुपए में बदला जा रहा है। बैंकरों का कहना है कि डॉलर की अचानक बढ़ी कीमत को सरकार या केंद्रीय बैंक प्रभावित नहीं कर रहे, बल्कि यह आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट जारी न करने से जुड़ी सख्त नीतियों के कारण हो रहा है।
व्यापारियों को ब्लैक मार्केट का सहारा
विदेशी मुद्रा के डीलर आतिफ अहमद के मुताबिक, 'विनिमय दर स्थिर है, क्योंकि डॉलर को बाहर ही नहीं जाने दे रहा है। आयात करने वाला सामान बंदरगाहों पर पड़ा है और स्टेट बैंक उसकी पेमेंट नहीं कर रहा है।' बैंकरों का कहना है कि व्यापारी अब सामान आयात करने के लिए ब्लैक मार्केट का सहारा ले रहे हैं। एक्सचेंज कंपनियों ने सरकार से कहा है कि 50 हजार डॉलर तक के आयात पर लेटर ऑफ क्रेडिट की अनुमति दी जाए।पाकिस्तान को सिर्फ IMF का सहारा
इस बीच स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पूर्व कार्यवाहक और डिप्टी गवर्नर मुर्तजा सैयद ने कहा है कि पाकिस्तान को जून में एक और आईएमएफ डील की जरूरत होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उसे अगले छह महीने में 10-12 अरब डॉलर का भुगतान करना होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान को अगले तीन साल में 35 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को कर्ज माफी की जरूरत है। अगर ऐसा न हुआ तो खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ेगा।from https://ift.tt/xW3XCri
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