लोन चुकाने में यहां उम्र गुजर जाती है और... चेहरा छिपा रहे वेणुगोपाल की 'धूतक्रीड़ा' की कहानी

लोन चुकाने की चिंता क्या होती है ये कोई मिडिल क्लास आदमी से जाने। जैसे-तैसे लोन लेकर आदमी घर बनाता है और फिर शुरू होता है बैंक का वो खौफनाक दवाब जो आम आदमी की नींद उड़ा देता है। महीने भर की थोड़ी सी सेलरी से घर चलाना, बच्चे पालना, स्कूल की फीस देना और साथ में बैंक की किश्त के नाम पर भारी-भरकम रकम। किसी महीने अगर किश्त नहीं दी तो बैंक का दवाब उस शख्श की नींद उड़ाने के लिए काफी होता है, लेकिन बैंक का ये खौफनाक चेहरा तो आम आदमी के लिए है। अमीरों के साथ तो होती है बैंक की सांठ-गांठ। बैंक का दोहरा चेहरा,गरीबों से लूट अमीरों से दोस्ती बैंक की एक दूसरी तस्वीर भी है जो उन खास लोगों के लिए है जो बैंक के साथ मिलकर ही करोड़ों का घोटाला करते भी हैं और किसी को पता भी नहीं चलता। देखिए इस तस्वीर को मास्क की आड़ में अपने चेहरे को छुपाते ये हैं देश के 100 अमीर आदमियों में शुमार वीडियोकॉन के मालिक वेणुगोपाल धूत जिनपर बैंक लोन की आड़ में करोड़ों रूपये का चूना लगाने के आरोप लगे हैं। करोड़ों की धोखाधड़ी करने के सालों बाद अब जब मामला सामने आया तो ये अपना मुंह छुपा रहे हैं, लेकिन इतने सालों तक ये बैंक के साथ मिलकर धोखाधड़ी करते रहे। ये तस्वीर उस वक्त की है जब वेणुगोपाल धूत को 3 दिन की सीबीआई कस्टडी में ले जाया जा रहा है। वीडियोकॉन कंपनी ने लगाया बैंक को चूना वेणुगोपाल पर आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के साथ मिलकर को एक दो करोड़ की नहीं बल्कि 1,730 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। सीबीआई ने इस कथित धोखाधड़ी के लिए कोचर, धूत और नूपावर रिन्यूएबल्स और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वेणुगोपाल ने साल 2010 और साल 2012 के बीच में चंदा कोचर की मदद से ICICI बैंक से 3,250 करोड़ रुपये का लोन लिया। सीबीआई के मुताबिक इस लोन को लेने की एवज में वेणुगोपाल ने चंदा कोचर के पति की कंपनी नूपावर रिन्यूएबल्स में 64 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट किया था। इसके अलावा मुंबई के चर्च गेट में वीडियोकॉन कंपनी का 5 करोड़ का एक फ्लैट दीपक कोचर को महज 11 लाख में दे दिया गया। इलेक्ट्रिक एप्लायंस बनाती है वीडियोकॉन दरअसल वीडियोकॉन कंपनी 2010 के बाद से लगातार घाटे में चल रही थी। एक जमाने में वीडियोकॉन का अच्छा खासा नाम था। 1985 में वीडियोकॉन कंपनी की स्थापना हुई थी। शुरुआती दिनों में ये कंपनी इलेक्ट्रिक एप्लायंस में काम करती थी। उस वक्त वेणुगोपाल धूत अपने पिता नंदलाल माधवलाल धूत के साथ कंपनी का कारोबार देख रहे थे।हर घर में वीडियोकॉन टेलीविजन, वीडियोकॉन वाशिंग मशीन हुआ करती थी। न सिर्फ भारत में बल्कि मैक्सिको, इटली, पोलैंड में भी वीडियोकॉन ने अपने प्लांट लगाए। भारत में पहला रंगीन टेलीविजन भी वीडियोकॉन का ही था। बाद में वेणुगोपाल ने इलेक्ट्रिक एप्लायंस के साथ-साथ टेलीकॉम, ऑयल और पावर सेक्टर में भी हाथ आजमाने की सोची, लेकिन यहां कंपनी को खासा नुकसान हुआ। लोन की धोखाधड़ी का ये मामला भी साल 2010 के बाद का ही है। दस साल तक सामने नहीं आया घोटाला इस धोखाधड़ी को दस साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन वीडिकॉन के मालिक इतने बड़े फ्रॉड के बावजूद सालों तक मजे से अपनी ज़िंदगी बिताते रहे। बैंक ने इतनी बड़ी रकम लोन के रूप में दे दी, लेकिन ये चेक करना जरूरी नहीं समझा कि क्या जिनको लोन दिया जा रहा है क्या वो इसके काबिल हैं। उस वक्त की बैंक की सीईओ चंदा कोचर और उनके पति ने अपना मुनाफा कमाया और वीडियोकॉन के मालिक ने अपना। तब न किसी को पेपर्स की याद आई, न कोई फॉर्मेलिटी की गई और अब सालों बाद जब ये फ्रॉड आम जनता के सामने आया तो आरोपी वीडियोकॉन कंपनी के मालिक को शर्म आ रही है और वो मुंह छुपाकर जा रहे हैं। म आदमी के साथ बैंक के सख्त रूल अगर कोई आम आदमी बैंक में एक छोटा सा लोन लेने जाएं तो उससे कई तरह के पेपर्स मांगे जाते हैं। उसकी इनकम का प्रूफ मांगा जाता है। यहां तक कि किसी अन्य से लोन की गारंटी भी ली जाती है। सौ तरह कि फॉर्मेलेटी होती हैं। बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते हैं तब कहीं जाकर 20-30 लाख का लोन मिलता है। इस लोन के लिए उस आम आदमी को हर महीने किश्त के रूप में भारी भरकम रकम चुकानी पड़ती है। इस किश्त में ब्याज इतना ज्यादा होता है कि सालों तक लोन से कई गुना ज्यादा पैसा बैंक को देने के बाद भी बैंक का कर्ज पूरा नहीं होता। और तो और किसी महीने किसी महीने किसी मजबूरी की वजह से अगर वो शख्स लोन की किश्त नहीं चुका पा रहा तो समझ लीजिए बैंक वाले उसके पीछे पड़ जाएंगे। आम आदमी को इस कदर दवाब बनाया जाएगा कि वो मानसिक तौर पर परेशान हो जाए। अ मीरों को बिना औपचारिकता के लोन क्यों? आखिर बैंक की ये दोहरी नीति क्यों है? जब आम आदमी को छोटा सा लोन देने के लिए इतनी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है तो क्यों अमीर उद्योगपतियों को बिना जांचे-समझे करोड़ों रूपये का लोन दे दिया जाता है। 2015 में फोर्ब्स ने वीडियकॉन के मालिक को देश के अमीर आदमियों में 61वां स्थान दिया था। उनकी कंपनी के नेटवर्थ 1.19 बिलियन थी जो आज के हिसाब से 98 अरब रुपये है। अब सोचिए इतना ज्यादा अमीर होने के बावजूद इस तरह की धोखाधड़ी को आप क्या कहेंगे।


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